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भाषाई विविधता ही राष्ट्रीय एकता का सुदृढ़ आधार

नवयुग कन्या महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के पावन अवसर पर नवयुग कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा ‘भाषाई विविधता: राष्ट्रीय एकता का आधार’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाषाओं के अंतर्संबंध, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर गंभीर एवं सारगर्भित विमर्श हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। समवेत स्वर में ‘वंदे मातरम्’ के गान से पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो उठा। भारतीय परंपरा के अनुरूप अतिथियों का सम्मान किया गया।

हिंदी विभाग की डॉ. अंकिता पाण्डेय ने स्वागत उद्बोधन में मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान का आधार है।

विशिष्ट वक्ता डॉ. राम बहादुर मिश्र ने अपने ओजपूर्ण संबोधन में कहा कि “विविधता में एकता भारत की आत्मा है और भाषाएं उसे पिरोने वाला सूत्र हैं।” उन्होंने लोक भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने की वकालत करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को हिंदी व्याकरण और अपनी जड़ों से जोड़ना समय की मांग है। अवधी की वाचिक परंपरा और लोकोक्तियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा—“लोकोक्ति और मुहावरे भाषा के प्राणतत्व हैं।” उन्होंने ‘भोजन, भजन, खजाना नारी, चारिउ पर्दा के हितकारी’ लोकोक्ति की रोचक व्याख्या कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य वक्ता प्रख्यात साहित्यकार डॉ. उमाशंकर शुक्ल ‘शितिकंठ’ ने मातृभाषा को सांस्कृतिक अस्मिता की संवाहिका बताया। उन्होंने हिंदी साहित्य सम्मेलन, नागरी प्रचारिणी सभा और राहुल सांकृत्यायन जैसे विद्वानों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय भाषाएं हिंदी के विकास में बाधा नहीं, बल्कि सहयोगी हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई भारतीय शब्दों को अंग्रेजी ने अपनाकर वैश्विक पहचान दी है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने मातृभाषा को शिक्षा और संस्कार का मूल आधार बताते हुए छात्राओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का गरिमामय समापन हुआ।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, हिंदू कन्या महाविद्यालय सीतापुर की डॉ. स्नेहलता, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। सभी ने भाषाई सौहार्द और मातृभाषा के संरक्षण का संकल्प लिया।

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