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कलंक तोड़ने और सच दिखाने की जिम्मेदारी मीडिया पर

यूपी में 1.38 लाख मरीज इलाज पर, फिर भी चुनौती बरकरार

: HIV पर जागरूकता की जंग, मीडिया को मिला अहम रोल

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क (DF हिंदी)

लखनऊ में एचआईवी/एड्स जैसे संवेदनशील विषय पर राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन एक अहम पहल के रूप में सामने आया। उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल आंकड़े साझा करना नहीं, बल्कि समाज में फैली भ्रांतियों और कलंक को तोड़ना भी रहा।

कार्यशाला में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में करीब 1.38 लाख एचआईवी संक्रमित लोग एआरटी केंद्रों पर मुफ्त परामर्श, उपचार और दवाएं ले रहे हैं। यह आंकड़ा जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को दर्शाता है, वहीं यह भी संकेत देता है कि संक्रमण की चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

संयुक्त निदेशक रमेश श्रीवास्तव ने मीडिया की भूमिका को “निर्णायक” बताते हुए कहा कि गलत या सनसनीखेज रिपोर्टिंग समाज में डर और भेदभाव को बढ़ा सकती है, जबकि तथ्यात्मक और संवेदनशील खबरें लोगों को जांच और इलाज के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

वहीं डॉ. संजय सोलंकी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच से नवजात को संक्रमण से बचाया जा सकता है। प्रदेश में 72 लाख गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से लगभग 62 लाख की जांच हो चुकी है—लेकिन लक्ष्य अभी भी अधूरा है, जो स्वास्थ्य तंत्र के सामने बड़ी चुनौती है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) का लक्ष्य 2030 तक संक्रमण और मृत्यु दर में 80% तक कमी लाना है। इसके लिए प्रदेश में सैकड़ों ICTC केंद्र, ART केंद्र, STI क्लीनिक और हेल्पलाइन 1097 जैसी सेवाएं संचालित हो रही हैं।

इसके बावजूद, असली लड़ाई जागरूकता और सामाजिक स्वीकार्यता की है। HIV से जुड़े कलंक और भेदभाव आज भी कई लोगों को जांच और इलाज से दूर रखते हैं।

कार्यशाला में मीडिया से अपील की गई कि वह जिम्मेदार रिपोर्टिंग के जरिए इस सामाजिक चुनौती को खत्म करने में सहयोग दे। क्योंकि HIV से लड़ाई सिर्फ दवाओं से नहीं, बल्कि सोच बदलने से जीती जाएगी।

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