राष्ट्रीय

मानव तस्करी पर केंद्र का सख्त रुख, ITPA कानून और ‘निर्भया कोष’ से कसी जा रही लगाम

महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति का विस्तार, 181 हेल्पलाइन से 24x7 मदद


डेटा नहीं, लेकिन कार्रवाई जारी—केंद्र ने राज्यों को सौंपी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क

महिलाओं की सुरक्षा और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अपने प्रयासों को और मजबूत करने का दावा किया है। Ministry of Women and Child Development के अनुसार, देश में अनैतिक व्यापार और यौन शोषण से जुड़े अपराधों पर नियंत्रण के लिए Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956 (ITPA) प्रभावी रूप से लागू है।

हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वेश्यावृत्ति की ओर जाने वाली महिलाओं या पकड़ी गई महिला भिखारियों के संबंध में कोई केंद्रीकृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यह भी बताया गया कि संविधान के तहत ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य का विषय है, इसलिए इन अपराधों की रोकथाम और कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की होती है।

महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित Mission Shakti एक प्रमुख योजना के रूप में उभरी है। इसके अंतर्गत ‘संबल’ और ‘समर्थ्य’ दो मुख्य घटक हैं। ‘संबल’ के तहत वन स्टॉप सेंटर (OSC) हिंसा से पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी सहायता, अस्थायी आश्रय और काउंसलिंग जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराते हैं।

इसके साथ ही 181 महिला हेल्पलाइन को 24×7 आपातकालीन सहायता के लिए शुरू किया गया है, जो Emergency Response Support System 112 से भी जुड़ी हुई है।

‘समर्थ्य’ के अंतर्गत शक्ति सदन जैसी योजनाएं संकटग्रस्त महिलाओं, विशेषकर मानव तस्करी की शिकार महिलाओं के पुनर्वास और संरक्षण के लिए काम कर रही हैं।

सरकार ने “निर्भया कोष” के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके तहत सुरक्षित शहर परियोजना, महिला हेल्प डेस्क, एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTU) और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी पहलें लागू की गई हैं।

मंत्री Savitri Thakur ने लोकसभा में बताया कि सरकार का फोकस महिलाओं की सुरक्षा, त्वरित न्याय और तकनीकी सशक्तिकरण पर है।

यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार नीति और संसाधन उपलब्ध करा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्यों के कंधों पर है।

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