राष्ट्रीय

दो चरणों में होगी जनगणना, जातीय गणना दूसरे चरण में—राजनीतिक बहस तेज

सेल्फ-एन्यूमरेशन और मोबाइल ऐप पर निर्भरता, डिजिटल गैप बना चुनौती

डिजिटल जनगणना 2027 की उलटी गिनती शुरू, डेटा और पारदर्शिता पर उठे सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क

देश की अगली जनगणना यानी Census 2027 की प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होने जा रही है, लेकिन इसके साथ ही कई सवाल और चिंताएं भी सामने आने लगी हैं। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी और इसमें पहली बार बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

पहले चरण में हाउस लिस्टिंग और सेल्फ-एन्यूमरेशन होगा, जो अप्रैल से अगस्त के बीच अलग-अलग राज्यों में 15 दिनों की अवधि में पूरा किया जाएगा। इसके बाद सितंबर तक घर-घर जाकर सत्यापन प्रक्रिया चलेगी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भरता ग्रामीण और तकनीकी रूप से पिछड़े इलाकों के लिए चुनौती बन सकती है।

इस बार सरकार ने मोबाइल एप और वेब पोर्टल के जरिए डेटा कलेक्शन की योजना बनाई है, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल साक्षरता जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।

सबसे ज्यादा बहस जातीय गणना को लेकर है, जिसे दूसरे चरण में शामिल किया जाएगा। यह कदम राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

जनगणना पोर्टल को 16 भाषाओं में उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें। बावजूद इसके, विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी स्तर पर जागरूकता और तकनीकी सहायता के बिना यह प्रक्रिया अधूरी रह सकती है।

कुल मिलाकर, Census 2027 देश के लिए एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी प्रयोग साबित होने जा रहा है, जिसकी सफलता न केवल डेटा की गुणवत्ता बल्कि सरकार की तैयारी और क्रियान्वयन क्षमता पर भी निर्भर करेगी।

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