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विधानसभा उपचुनाव नतीजे: इंडिया गठबंधन की जीत और बीजेपी के पिछड़ने के मायने

विधानसभा उपचुनाव: शनिवार को सात राज्यों की तेरह विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम सामने आए हैं। इनमें इंडिया गठबंधन के दलों ने 10 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि बीजेपी को केवल दो सीटों पर सफलता मिली। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।

हालांकि ये उपचुनाव बड़े चुनाव नहीं थे, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इन नतीजों पर काफी उत्साह दिखाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि, “इन नतीजों से साफ हो गया है कि भाजपा का भय और भ्रम का जाल अब टूट चुका है।” वहीं प्रियंका गांधी ने कहा, “देश की जनता अब समझ चुकी है कि सौ साल पीछे और सौ साल आगे भटकने वाली राजनीति से देश का भला नहीं हो सकता।”

बीजेपी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में जिन सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की, वे पहले स्वतंत्र विधायक के पास थीं, और उत्तराखंड की दोनों सीटें भी पहले कांग्रेस के पास ही थीं। उपचुनाव में जिन 13 सीटों पर चुनाव हुए, उनमें से बीजेपी के पास पहले केवल चार सीटें थीं, जबकि तीन सीटें निर्दलीय विधायकों के पास थीं। बीजेपी ने मध्यप्रदेश की जो सीट जीती है, वह पहले कांग्रेस के पास थी।

उत्तराखंड में हार

उत्तराखंड में दो सीटों पर चुनाव हुआ, और बीजेपी दोनों सीटें हार गई। मंगलौर में कांग्रेस ने बीजेपी को हराया, जबकि बद्रीनाथ सीट पर भी कांग्रेस ने बीजेपी को हराया है।

हिमाचल प्रदेश और पंजाब

हिमाचल प्रदेश में तीन में से दो सीटें कांग्रेस को मिलीं, जबकि एक सीट बीजेपी ने जीती। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने एक सीट पर विजय प्राप्त की।

मध्यप्रदेश और बंगाल

मध्यप्रदेश में बीजेपी ने एक सीट पर जीत हासिल की, जबकि बंगाल में चार सीटों पर उपचुनाव था, और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सभी चार सीटें जीत लीं। इनमें से तीन सीटें पहले बीजेपी के पास थीं।

विपक्ष का नैरेटिव मज़बूती से उभर रहा है


विश्लेषक मानते हैं कि, भले ही ये उपचुनाव बड़े न हों, लेकिन इनका सांकेतिक महत्व काफी है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, देश में किसी भी चुनाव या उपचुनाव में बीजेपी की जीत की धारणा बनाई गई थी। हेमंत अत्री का कहना है, “लोकसभा चुनावों और फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) में बीजेपी की हार ने यह साबित कर दिया है कि बीजेपी अब अजेय नहीं है।”

अत्री के अनुसार, लोकसभा चुनावों के बाद विपक्ष में विश्वास जागा है कि बीजेपी को हराया जा सकता है, और यही विश्वास उपचुनाव के नतीजों में दिखा है।

बीजेपी के लिए चेतावनी


लोकसभा चुनावों में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, और विपक्ष भी एकजुट हुआ है। उपचुनावों के नतीजे बीजेपी के लिए एक चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं। धर्म की राजनीति को नकारा गया है, जैसा कि उत्तराखंड की बद्रीनाथ सीट पर देखा गया, जहां मतदाताओं ने धर्म के नाम पर वोट मांगने की बीजेपी की कोशिश को नकार दिया।

विपक्ष के लिए संकेत

विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष की एकजुटता अब और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इंडिया गठबंधन के दलों को समझना होगा कि यदि वे एकजुट नहीं रहते, तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। अत्री के अनुसार, “जो दल बीजेपी को समर्थन देते रहे हैं, वे आज हाशिए पर जा चुके हैं। विपक्षी गठबंधन को यह समझना होगा कि बिखरने की स्थिति में उनका राजनीतिक अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।”

इस प्रकार, उपचुनाव के नतीजे यह संकेत देते हैं कि विपक्षी दलों को एकजुट रहकर बीजेपी को चुनौती देने की जरूरत है, और बीजेपी की धर्म आधारित राजनीति को अब मतदाता नकार रहे हैं।

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