भारत निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान किया। हालांकि, उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों समेत देशभर में खाली पड़ी 46 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा नहीं की गई, जिससे राजनीतिक दलों और जनता में निराशा फैल गई है। इस पर निर्वाचन आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इन सीटों पर छह महीने के भीतर चुनाव कराए जाएंगे, लेकिन वर्तमान में मौसम की स्थिति उपयुक्त नहीं है।
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वायनाड लोकसभा सीट समेत उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, और अन्य राज्यों में कई विधानसभा सीटें रिक्त हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के चलते इन राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है, जिससे चुनाव कराने में मुश्किलें आ सकती हैं।
छह महीने के भीतर उपचुनाव होंगे:
राजीव कुमार ने जोर देकर कहा कि आयोग इन उपचुनावों को दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ आयोजित करने की तैयारी में था, लेकिन वर्तमान मौसम को देखते हुए यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि छह महीने के भीतर इन रिक्त सीटों पर उपचुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे।
फेक नैरेटिव से निपटने की तैयारी:
मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावों में फैलाए जा रहे फेक नैरेटिव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए आयोग पूरी तरह से सतर्क और तैयार है। उनका कहना है कि फेक नैरेटिव एक गुब्बारे की तरह होता है, जिसे अगर समय पर नहीं फोड़ा गया, तो यह बड़ा हो सकता है और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
जम्मू-कश्मीर चुनाव की तारीख को लेकर कोई भ्रम नहीं:
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की तारीख 30 सितंबर के बाद रखने के सवाल पर राजीव कुमार ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। श्री अमरनाथ यात्रा और विभिन्न त्योहारों के चलते चुनाव कार्यक्रम को 30 सितंबर के बाद भी रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद आयोग ने राज्य का अंतिम चरण का चुनाव एक अक्टूबर को कराने का ऐलान किया है।