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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की द्विपक्षीय मुलाकात, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली – भारत और मलयेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मलयेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर बिन इब्राहिम के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह अनवर इब्राहिम की प्रधानमंत्री के रूप में पहली भारत यात्रा है, जिसमें दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
औपचारिक स्वागत और गर्मजोशी से मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में अनवर इब्राहिम का औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से गले मिलकर अपने देशों के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक दिखाया। इसके बाद, मलयेशिया के प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली स्थित महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
द्विपक्षीय वार्ता और प्रमुख मुद्दे
प्रधानमंत्री मोदी और अनवर इब्राहिम के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा, विवादास्पद इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। जाकिर नाइक को लेकर भारत और मलयेशिया के बीच संबंधों में पहले से ही तनाव रहा है, और अब दोनों देशों की कोशिश है कि रिश्तों को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

 उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और आगामी समझौते
अनवर इब्राहिम के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, और उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से की जा रही है, खासकर जाकिर नाइक के मुद्दे के बाद आई खटास को दूर करने के लिए।
राष्ट्रपति और विदेश मंत्री से मुलाकात
मलयेशिया के प्रधानमंत्री ने दिल्ली पहुंचने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात की। इसके अलावा, वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलेंगे। इस यात्रा के दौरान भारत और मलयेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नई ऊर्जा देखने को मिल रही है, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
इस मुलाकात ने भारत और मलयेशिया के बीच आपसी सहयोग और विश्वास को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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