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महिला सुरक्षा पर राष्ट्रीय लोकदल पार्टी से नम्रता शुक्ला का बयान: “डर को हराओ, अधिकारों को जानो”

लखनऊ: आज देशभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता की लहर दौड़ रही है। महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और अत्याचारों के मामलों में वृद्धि ने समाज के हर वर्ग को हिला दिया है। इस गंभीर स्थिति में राष्ट्रीय लोकदल पार्टी की प्रदेश महासचिव नम्रता शुक्ला ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसने प्रदेश की शोषित और पीड़ित महिलाओं में नई ऊर्जा और हौसला भर दिया है।

नम्रता शुक्ला ने कहा, “आज देश में महिलाओं के साथ जो भी कृत्य हो रहा है, यह जानकर मुझे बहुत पीड़ा हो रही है। लेकिन मैं अपना अनुभव आपके साथ साझा करना चाहती हूँ। अगर आपको सुरक्षित महसूस करना है, तो आपको पहले अपने अंदर के डर को हराना होगा। जैसे मैंने हराया है, अपने अधिकार को जानना होगा, तब जाकर आप दुर्गा और काली बन सकती हैं।”

 

नम्रता शुक्ला का यह बयान समाज में महिलाओं को जागरूक और सशक्त बनाने के उद्देश्य से दिया गया है। उनके अनुसार, महिलाएं तभी सुरक्षित महसूस कर सकती हैं, जब वे अपने अधिकारों को जानें और डर के साये से बाहर निकलें। “यह तभी संभव होगा जब सभी महिलाओं का डर खत्म होगा,” उन्होंने आगे कहा। “हमें अपने लिए पहले लड़ना होगा।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार इजाफा हो रहा है और समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है। नम्रता शुक्ला के इस सशक्तिकारी वक्तव्य ने प्रदेश की महिलाओं में एक नई उम्मीद जगा दी है। उनके इस साहसिक दृष्टिकोण से न सिर्फ महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने का संदेश मिला है, बल्कि उनके मनोबल को भी प्रोत्साहन मिला है।

नम्रता शुक्ला का यह संदेश एक स्पष्ट आह्वान है कि महिलाएं खुद को असहाय महसूस करने की बजाय अपने भीतर की शक्ति को पहचानें और खुद के हक के लिए संघर्ष करें। उनके बयान ने महिलाओं को यह समझने के लिए प्रेरित किया है कि सशक्तिकरण केवल बाहरी सुरक्षा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि आत्मबल और आत्मविश्वास की भी आवश्यकता है।

महिलाओं ने नम्रता शुक्ला के इस विचार को खुले दिल से अपनाया है। उनकी बातें सीधे महिलाओं के दिल तक पहुंची हैं, और यही कारण है कि प्रदेश की कई शोषित और पीड़ित महिलाएं उन्हें अपना रक्षक मान रही हैं। उनके बयान से एक नई प्रेरणा मिली है और महिलाएं उनके साथ खड़ी हो रही हैं, उन्हें अपना ‘सारथी’ मानकर उनके नेतृत्व में अपने अधिकारों के लिए जागरूक हो रही हैं।

इस बयान के बाद, कई सामाजिक संगठनों और महिलाओं के समूहों ने नम्रता शुक्ला के साथ मिलकर महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए जागरूकता फैलाने की योजना बनाई है। उनके इस प्रयास ने महिलाओं में आत्मविश्वास का संचार किया है और समाज में यह संदेश दिया है कि महिलाएं किसी भी अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने के लिए तैयार हैं।

देश भर में महिला सुरक्षा की दिशा में यह बयान एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जिस प्रकार से नम्रता शुक्ला ने अपने अनुभवों से महिलाओं को जागरूक किया है, वह न केवल समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि एक नई दिशा और दृष्टिकोण भी प्रदान करता है।

 

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