उत्तर प्रदेश

लखीमपुर खीरी में भाजपा विधायक मंजू त्यागी पर सपा नेता का नामांकन पत्र छीनने का आरोप सपा ने भाजपा पर साधा निशाना

लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता ने भाजपा विधायक मंजू त्यागी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा नेता का कहना है कि सहकारी समिति के चुनाव के दौरान विधायक मंजू त्यागी ने उनके नामांकन पत्र को जबरन छीन लिया, जिससे चुनाव प्रक्रिया बाधित हो गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिस पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

 घटना का पूरा विवरण

मामला फूलबेहड़ सहकारी समिति के चुनाव का है, जहां सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष अनुराग पटेल, सपा जिला अध्यक्ष रामपाल यादव और पूर्व विधायक रामसरन ने भाजपा विधायक मंजू त्यागी पर आरोप लगाया कि उन्होंने एसडीएम की मौजूदगी में उनके उम्मीदवार के नामांकन पत्र को छीन लिया। अनुराग पटेल ने दावा किया कि उनके उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था और इसका सबूत भी उनके पास है।
सपा नेताओं ने इस घटना के बाद भाजपा विधायक पर कड़ी निंदा की और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास बताया। सपा का आरोप है कि भाजपा विधायक ने सत्ता का दुरुपयोग करते हुए नामांकन प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की।

रिटर्निंग ऑफिसर की प्रतिक्रिया

रिटर्निंग ऑफिसर ने इस मामले पर अपनी टिप्पणी देने से इनकार कर दिया, लेकिन बताया कि 16 नामांकन पत्र खरीदे गए थे, हालांकि गुरुवार को कोई नामांकन दाखिल नहीं किया गया। रिटर्निंग ऑफिसर ने विधायक मंजू त्यागी पर लगे आरोपों पर सीधा जवाब देने से बचते हुए सिर्फ यह जानकारी दी कि चुनाव प्रक्रिया अभी जारी है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया

इस घटना पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला किया। अखिलेश यादव ने कहा, “लखीमपुर के श्रीनगर विधानसभा से भाजपा विधायक मंजू त्यागी ने गन्ना समिति के चुनाव का पर्चा एसडीएम के हाथ से छीन लिया और फरार हो गईं। योगी सरकार के अफसर बस देखते रह गए और विधायक के समर्थकों से गाली-गलौज की भी खबरें आई हैं। अब सीएम योगी बताएं, उनका बुलडोजर कहां है? क्या यही है उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव की स्थिति?”
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि यह घटना यूपी में भाजपा की “गुंडई और माफियागिरी” की पहचान बन चुकी है, और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर इसे बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा पर सत्ता के मद में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए इसे शर्मनाक बताया।

राजनीतिक माहौल गरमाया

इस घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां सपा इसे भाजपा की “तानाशाही” और “लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को तोड़ने की कोशिश” बता रही है, वहीं भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या यह घटना आगामी चुनावों पर कोई असर डालती है।

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