दिल्ली की नई मुख्यमंत्री बनने जा रहीं आतिशी को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने एक बार फिर से गंभीर आरोप लगाए हैं। स्वाति ने आतिशी के माता-पिता पर संसद हमले के आरोपी सैयद अब्दुल रहमान गिलानी के साथ गहरे संबंध होने का दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आतिशी के माता-पिता ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी से बचाने के लिए लड़ाई लड़ी थी।
स्वाति मालीवाल का आरोप
स्वाति मालीवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “आतिशी मर्लेना के माता-पिता के एसएआर गिलानी के साथ गहरे संबंध थे। गिलानी पर आरोप था कि संसद पर हमले में उनका हाथ था। 2016 में गिलानी ने अफजल गुरु की याद में दिल्ली के प्रेस क्लब में एक प्रोग्राम किया था, जिसमें आतिशी के माता-पिता मंच पर गिलानी के साथ थे। इस प्रोग्राम में विवादित नारे भी लगाए गए थे।” स्वाति ने यह भी आरोप लगाया कि आतिशी के माता-पिता ने गिलानी के समर्थन में लेख भी लिखे थे।
स्वाति के पुराने आरोप
यह पहला मौका नहीं है जब स्वाति मालीवाल ने आतिशी पर निशाना साधा हो। इससे पहले, जब विधायक दल की बैठक में आतिशी को मुख्यमंत्री चुनने का फैसला हुआ था, तब भी स्वाति ने आतिशी के परिवार पर अफजल गुरु को फांसी से बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि आतिशी के माता-पिता ने अफजल गुरु के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी और उनके हिसाब से अफजल निर्दोष था।
आम आदमी पार्टी का पलटवार
स्वाति मालीवाल के इन आरोपों के बाद आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया। आप विधायक दिलीप पांडेय ने स्वाति से राज्यसभा से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वाति मालीवाल अब भाजपा की भाषा बोल रही हैं और उनके बयान भाजपा से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, “आप ने स्वाति को राज्यसभा में भेजा, लेकिन अब वह भाजपा की स्क्रिप्ट से बयान दे रही हैं। यदि स्वाति मालीवाल को राज्यसभा में बने रहने का इतना ही शौक है, तो उन्हें भाजपा से टिकट ले लेना चाहिए।”
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद उस समय गहराया, जब आतिशी को दिल्ली की नई मुख्यमंत्री के रूप में चुने जाने की घोषणा हुई। स्वाति मालीवाल ने आतिशी को ‘डमी सीएम’ बताते हुए कहा कि यह निर्णय देश की सुरक्षा से संबंधित है। उन्होंने दिल्ली की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आतिशी के परिवार ने अफजल गुरु का समर्थन किया था, जो देश के लिए खतरे की बात है।
आतिशी पर लगाए गए ये आरोप एक नए राजनीतिक मोड़ की ओर इशारा कर रहे हैं, जबकि दिल्ली की राजनीति में यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है।
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