महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और महा विकास आघाड़ी (MVA) में सीटों के बंटवारे को लेकर दरारें उभरने लगी हैं। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने सीट बंटवारे में देरी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। राउत ने कहा कि कांग्रेस की व्यस्तताओं के चलते गठबंधन में सीटों के बंटवारे की चर्चा अटकी हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लगातार तीन दिनों तक बैठकें होंगी।
कांग्रेस पर देरी का आरोप
संजय राउत ने बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि MVA के प्रमुख घटक—शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और अन्य छोटे दल—मुंबई में बैठक करेंगे। यह बैठक 18 से 20 सितंबर तक तीन दिन चलेगी, जिसमें सीट बंटवारे पर अंतिम रूप दिया जाएगा। राउत ने कहा, “कांग्रेस इस दौरान काफी व्यस्त रही है, लेकिन हमने उन्हें बुलाया है ताकि बातचीत जल्द से जल्द समाप्त हो सके। वे तारीख पर तारीख दे रहे हैं, इसीलिए हमने फैसला किया है कि अब तीन दिन लगातार बैठकर यह मसला सुलझाया जाएगा।”
मुंबई की सीटों पर बनी सहमति, अन्य क्षेत्रों में खींचतान
राउत ने कहा कि मुंबई की सीटों को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य के लिए क्षेत्रवार चर्चा जरूरी है। “हमें कोल्हापुर, अमरावती और रामटेक जैसी सीटों पर भी बात करनी है, जो परंपरागत रूप से शिवसेना (यूबीटी) की सीटें रही हैं, लेकिन उन्हें कांग्रेस को दे दिया गया है। अगर ये सीटें हमारे पास होतीं, तो हम निश्चित रूप से जीत दर्ज करते,” राउत ने कहा।
‘हमारे वोट कांग्रेस और एनसीपी को मिले‘
राउत ने आगे दावा किया कि इस साल के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के वोट बड़ी संख्या में कांग्रेस और एनसीपी को ट्रांसफर हुए थे, जिससे उनकी जीत की संभावना बढ़ी। उन्होंने कहा कि सीटों के बंटवारे का फार्मूला इस आधार पर तय किया जाएगा कि कौन-सी पार्टी किस सीट पर सबसे मजबूत है और जीतने की क्षमता रखती है।
राउत ने यह भी कहा कि सीट बंटवारे का यह फॉर्मूला अंतिम होगा और इसे लेकर कोई और देरी नहीं की जाएगी। शिवसेना (यूबीटी) 90-100 सीटों पर दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस 120-130 सीटों पर जोर दे रही है। एनसीपी (एसपी) ने 75-80 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई है।
नवंबर के मध्य में संभावित चुनाव
महाराष्ट्र में 288 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव इस साल नवंबर के मध्य में होने की संभावना है। महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस लोकसभा चुनाव के दौरान सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जिसके बाद से वह विधानसभा चुनाव में भी बड़े हिस्से की मांग कर रही है।
आगे की राह और गठबंधन की चुनौतियां
MVA में सीट बंटवारे को लेकर उभरी खींचतान आने वाले चुनावों में गठबंधन की ताकत और एकजुटता को प्रभावित कर सकती है। संजय राउत का यह बयान दर्शाता है कि कांग्रेस और अन्य दलों के बीच बातचीत में मतभेद उभर रहे हैं, जिन्हें समय रहते सुलझाना जरूरी है। वहीं, गठबंधन के अन्य नेता यह देखना चाहेंगे कि सीट बंटवारे का कोई ठोस फार्मूला निकले, जिससे सभी दलों के हित सुरक्षित रहें और चुनावों में उनका प्रदर्शन बेहतर हो।
MVA के लिए यह चुनावी मोर्चा महत्वपूर्ण है, क्योंकि महाराष्ट्र की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक मजबूत दावेदार बनी हुई है। सीट बंटवारे में देरी और संभावित असहमति अगर सुलझाई नहीं जाती, तो यह गठबंधन के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।