दिल्ली

केजरीवाल करेंगे जनता की अदालत में इंसाफ की मांग, ईमानदारी का प्रमाण लेकर ही बनेंगे मुख्यमंत्री

आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में जंतर मंतर पर 22 सितंबर को जनता की अदालत का आयोजन करने की घोषणा की है, जहां पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल अपनी बात जनता के सामने रखेंगे। केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कहा था कि वह तभी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे, जब जनता उन्हें ईमानदारी का प्रमाणपत्र देगी।
 जनता का फैसला होगा अंतिम
अरविंद केजरीवाल ने अपने इस्तीफे के बाद कहा था, “मैं तब तक मुख्यमंत्री नहीं बनूंगा जब तक दिल्ली की जनता मुझे ईमानदार नहीं मान लेती। जनता की अदालत में मैं अपनी बात रखूंगा और उन्हीं के आदेश के बाद ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठूंगा।” उन्होंने साफ कर दिया कि जनता का फैसला ही उनके लिए सर्वोपरि होगा।
आतिशी लेंगी मुख्यमंत्री पद की शपथ
इस बीच, 21 सितंबर को आतिशी दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगी। उनके साथ केजरीवाल सरकार के सभी मौजूदा मंत्रियों को भी दुबारा से मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। इनमें गोपाल राय, कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज और इमरान हुसैन शामिल हैं, जो पहले भी केजरीवाल कैबिनेट का हिस्सा रह चुके हैं। इसके अलावा, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से विधायक मुकेश अहलावत को भी मंत्री पद दिया जा रहा है।
नई कैबिनेट में बदलाव की संभावना
आतिशी के नेतृत्व में बनने वाली नई कैबिनेट में एक स्थान अभी भी खाली है, और पार्टी में इसके लिए विचार-विमर्श चल रहा है। शपथ ग्रहण से पहले इस पद के लिए नाम की घोषणा भी की जा सकती है। कैबिनेट में अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि के रूप में पहली बार विधायक बने मुकेश अहलावत को शामिल किया गया है, जबकि इससे पहले राजकुमार आनंद इस श्रेणी का प्रतिनिधित्व करते थे।
 केजरीवाल की अगली भूमिका पर नजरें
अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे और जनता की अदालत में अपनी बात रखने की घोषणा ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है। उनकी अगली भूमिका और जनता का फैसला इस बात को तय करेगा कि वह दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं। AAP के समर्थक इस आयोजन को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि यह उनके नेतृत्व के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
जनता की अदालत में आने वाले फैसले का सभी को बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि केजरीवाल की ईमानदारी और उनकी राजनीति के मूल्यों पर जनता की मुहर ही उनके भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगी।

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