अंतरराष्ट्रीय
इजराइल ने हवाई हमले में 70 लाख डॉलर के इनामी हिजबुल्लाह कमांडर को मार गिराया

बेरूत: इजराइल ने शुक्रवार, 20 सितंबर को एक बड़े हवाई हमले में हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर इब्राहिम अकील को मार गिराने का दावा किया है। यह हमला दक्षिण बेरूत में एक इमारत पर किया गया, जो हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है। इस हमले में इमारत पूरी तरह नष्ट हो गई, जिसमें 14 लोग मारे गए और 66 अन्य घायल हो गए। मरने वालों में 10 हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कार्यकर्ता थे, जो एक उच्चस्तरीय बैठक में शामिल थे। हिजबुल्लाह ने भी इब्राहिम अकील की मौत की पुष्टि करते हुए उसे “महान जिहादी नेता” करार दिया।
अमेरिकी दूतावास बम धमाके का मुख्य आरोपी था अकील
इब्राहिम अकील पर 1983 में बेरूत स्थित अमेरिकी दूतावास और मरीन बैरकों पर हुए बम धमाकों में शामिल होने का आरोप था। इन हमलों में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। इस घटना के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अकील पर 70 लाख डॉलर का इनाम रखा था। इसके अलावा, अकील को 1980 के दशक में कई अमेरिकी और यूरोपीय नागरिकों के अपहरण के लिए भी जिम्मेदार ठहराया गया था।
इजराइल पर हमले की योजना बना रहा था अकील
इजराइली सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इब्राहिम अकील उस वक्त मारा गया, जब वह इजराइल के खिलाफ एक बड़े हमले की योजना बना रहा था। इस योजना में इजराइल के उत्तरी क्षेत्रों पर हमला और “गैलील पर विजय” नामक एक आक्रमण अभियान शामिल था। यह हिजबुल्लाह की एक रणनीतिक बैठक थी, जिसमें इजराइली समुदायों में घुसपैठ की तैयारी की जा रही थी।
हिजबुल्लाह का जवाबी हमला
अकील की मौत का बदला लेने के लिए हिजबुल्लाह ने इजराइल के सैन्य ठिकानों पर दर्जनों रॉकेट दागे। इजराइल और लेबनान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे क्षेत्र में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इस हवाई हमले में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई घायल गंभीर स्थिति में हैं।
क्षेत्रीय तनाव में बढ़ोतरी
इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव से मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इसरायली सेना की इस बड़ी सफलता से एक ओर जहां देश के उत्तरी इलाकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर हिजबुल्लाह समर्थकों में इसका गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह हमला और उसके परिणाम महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे इजराइल और लेबनान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध और बिगड़ सकते हैं।
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