कर्नाटक : में राजनीतिक माहौल गरमा गया है, जब बंगलुरु की एक अदालत ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। यह मामला जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह अध्यक्ष आदेश अय्यर द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चुनावी बॉन्ड योजना के जरिए जबरन वसूली की गई।
क्या है मामला?
आदेश अय्यर ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड योजना के माध्यम से राजनीतिक चंदे के नाम पर धमकी देकर वसूली की गई। इस मामले में निर्मला सीतारमण, ईडी अधिकारियों, और भाजपा नेताओं के खिलाफ धारा 384 (जबरन वसूली), 120 बी (आपराधिक साजिश) और 34 (साझा इरादे से अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
क्या है चुनावी बॉन्ड?
चुनावी बॉन्ड योजना 2018 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य राजनीतिक दलों को नकद चंदा समाप्त कर पारदर्शिता लाना था। इसके तहत, लोग स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के माध्यम से राजनीतिक दलों को दान दे सकते थे, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती थी। हालांकि, 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को असंवैधानिक घोषित करते हुए इसे रद्द कर दिया था, क्योंकि यह नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करती थी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने साधा निशाना
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस्तीफा मांगा और कहा कि भाजपा नेताओं को भी अब जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, “निर्मला सीतारमण पर गंभीर आरोप हैं और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। तीन महीने के भीतर मामले की पूरी जांच होनी चाहिए।”
राजनीतिक हलचल तेज
इस घटना के बाद कर्नाटक और राष्ट्रीय राजनीति में काफी हलचल है। भाजपा की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर आक्रामक होते नजर आ रहे हैं।