बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर, प्रसिद्ध चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपनी सियासी पार्टी ‘जन सुराज’ का औपचारिक ऐलान किया। इस घोषणा के साथ, प्रशांत किशोर अब पूर्ण रूप से राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं और बिहार के लिए एक नई राजनीतिक दिशा देने की तैयारी कर रहे हैं।
जन सुराज’ का गठन और रणनीति
पटना के वेटरनरी ग्राउंड में आयोजित एक भव्य सभा में प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी ‘जन सुराज’ की औपचारिक घोषणा की। इस दौरान उन्होंने पार्टी की रूपरेखा, नेतृत्व और रणनीति पर चर्चा की। प्रशांत किशोर ने बताया कि उनकी पार्टी का उद्देश्य बिहार के विकास और बदलाव के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि पार्टी का गठन एक करोड़ सदस्यों के साथ किया जाएगा, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष, नेतृत्व परिषद, और पार्टी का संविधान भी घोषित किया जाएगा।
5000 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद पार्टी का ऐलान
प्रशांत किशोर ने पार्टी के ऐलान से पहले 5000 किलोमीटर की पदयात्रा की, जिसमें उन्होंने बिहार के 17 जिलों का दौरा किया और 5500 गांवों में चौपाल और सभाएं कीं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने जनता की समस्याओं, जैसे पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा, और पिछड़ेपन को सुना और उन्हें अपनी पार्टी के प्रमुख मुद्दे बनाए।
बिहारी पहचान पर जोर
अपने संबोधन में प्रशांत किशोर ने बिहार के लोगों की पहचान और उनके आत्मसम्मान पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आप सभी को ‘जय बिहार’ इतनी जोर से बोलना है कि कोई आपको और आपके बच्चों को बिहारी न कहे जैसे यह एक गाली हो। आपकी आवाज दिल्ली, बंगाल, तमिलनाडु और बंबई तक पहुंचनी चाहिए, जहां भी बिहारी छात्रों के साथ दुर्व्यवहार हुआ है।”
पार्टी के आगे की योजना
प्रशांत किशोर ने पार्टी के गठन के बाद कई फैसले लेने का भी ऐलान किया, जिसमें पार्टी का अध्यक्ष कौन होगा और उसका कार्यकाल कितना होगा, यह तय किया जाएगा। इसके साथ ही पार्टी की भविष्य की रणनीति और जिम्मेदारियों का बंटवारा भी किया जाएगा।
बिहार की राजनीति में नई लहर
प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी बिहार की राजनीति में नई ऊर्जा और बदलाव की उम्मीद जगाती है। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य की मौजूदा समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी बिहार के युवाओं, किसानों, और प्रवासी मजदूरों की आवाज बनेगी।
प्रशांत किशोर की यह नई पार्टी बिहार की राजनीतिक पटल पर कितना असर डालेगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन उनका यह कदम राज्य की सियासत में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।