इंदौर: नवरात्रि पर्व के दौरान गरबा महोत्सव में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर विवादित बयान देने के बाद भाजपा के जिलाध्यक्ष चिंटू वर्मा ने अपने बयान पर सफाई दी है। वर्मा ने पहले कहा था कि गरबा पंडाल में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को गौमूत्र पिलाया जाए, जिससे केवल हिंदू ही पंडाल में प्रवेश कर सकें।
बयान का तूल पकड़ना
चिंटू वर्मा का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से फैल गया, जिसके बाद विवाद बढ़ता देख उन्होंने इसे अपने व्यक्तिगत विचार बताते हुए सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका बयान पवित्र भावना से दिया गया था और इसका मतलब गौमूत्र की अनिवार्यता से नहीं था।
वर्मा ने कहा, “यह मेरे विचार हैं, मेरी आस्था है, जिसे मैंने व्यक्त किया। कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद का रूप दे दिया है। व्यक्तिगत विचारों पर विवाद नहीं होना चाहिए।”
गौमूत्र के उपयोग का तर्क
चिंटू वर्मा ने यह भी कहा कि गौमूत्र पिलाने से यह पता चल जाएगा कि कौन हिंदू है और कौन गैर हिंदू। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरीके से आयोजनों में केवल हिंदू लोग ही शामिल हो सकेंगे। उनका कहना था कि इस विधि से न केवल पहचान सुनिश्चित होगी, बल्कि भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
“आधार कार्ड को भी एडिट किया जा सकता है, लेकिन गौमूत्र ही एक ऐसा तरीका है, जिससे लोगों की असली पहचान हो जाएगी। गैर हिंदू युवक गरबा में आने के लिए तिलक भी लगवा लेते हैं और हाथ पर कलावा भी बांध लेते हैं,” वर्मा ने कहा।
गरबा आयोजकों से अपील
भाजपा जिलाध्यक्ष ने शहर के सभी गरबा आयोजकों से अपील की कि वे गरबा में आने वाले सभी लोगों को गौमूत्र पिलाने के बाद ही पंडाल में प्रवेश करने दें। उन्होंने कहा, “इससे न केवल साफ-सफाई बनी रहेगी, बल्कि लाठी-डंडे की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।”
विवाद का ऐतिहासिक संदर्भ
यह पहला अवसर नहीं है जब गरबा पर्व के दौरान इस तरह के विवाद उठे हैं। हर साल इस पर्व के पहले इस प्रकार के बयान और घटनाएं देखने को मिलती हैं, जिनसे समाज में तनाव पैदा होता है।
चिंटू वर्मा का यह बयान न केवल धार्मिक भावनाओं को भड़का सकता है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी उनकी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे में यह देखना होगा कि भाजपा इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती है।