उत्तर प्रदेश के उपचुनावों में सीट मिलने की अनिश्चितता ने निषाद पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की बेचैनी बढ़ा दी है। संजय निषाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर दबाव बना रहे हैं कि भले ही उपचुनाव में उम्मीदवार बीजेपी का हो, लेकिन चुनावी सिंबल निषाद पार्टी का होना चाहिए। पार्टी कार्यकर्ताओं की मंशा का हवाला देते हुए संजय निषाद प्रेशर पॉलिटिक्स खेल रहे हैं और मझवा और कटेहरी सीटों पर दावा ठोक रहे हैं।
बीजेपी नेतृत्व पर दबाव
संजय निषाद ने यूपी बीजेपी नेतृत्व से इन उपचुनावों में सीट की मांग की है, और इसके लिए वह केंद्रीय नेतृत्व से भी लगातार संपर्क में हैं। निषाद पार्टी, जो बीजेपी के साथ गठबंधन में आने के बाद तेजी से उभरी है, अब बीजेपी पर अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए जोर दे रही है। पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद का पूरा परिवार राजनीति में सक्रिय हो चुका है—संजय निषाद खुद कैबिनेट मंत्री हैं, उनका एक बेटा विधायक है और दूसरा बेटा सांसद बनने का टिकट पा चुका है।
पारिवारिक राजनीति का विस्तार
संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद बीजेपी के सहारे दो बार सांसद रह चुके हैं। हालांकि, संतकबीरनगर से प्रवीण निषाद को टिकट दिलाने के बावजूद वह सीट जीतने में असफल रहे। संजय निषाद ने हार का कारण अपने बेटे को पार्टी सिंबल पर टिकट न मिलना बताया है।
निषाद पार्टी की बढ़ती ताकत
बीजेपी के साथ गठबंधन में आने के बाद निषाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत की है। पहले जहां पार्टी का कोई विशेष आधार नहीं था, वहीं अब यह पार्टी 11 सीटों तक पहुंच चुकी है। अब, उपचुनावों में सीट न मिलने की आशंका के चलते संजय निषाद बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं ताकि उनकी पार्टी को महत्वपूर्ण भूमिका मिल सके।
राजनीतिक रणनीति
संजय निषाद की प्रेशर पॉलिटिक्स और सीटों पर जोरदार दावा इस बात की ओर इशारा करता है कि निषाद पार्टी आगामी चुनावों में अपनी स्थिति और ताकत को बनाए रखना चाहती है। वहीं, बीजेपी के साथ गठबंधन के जरिए निषाद पार्टी का भविष्य भी निर्धारित होगा।