मथुरा: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार देर शाम मथुरा के परखम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। यह बैठक मिशन 2027 की तैयारियों के मद्देनज़र बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब दो घंटे तक चली इस गहन चर्चा में कई अहम मुद्दों पर मंथन हुआ, जिसमें खासतौर पर आगामी विधानसभा चुनाव 2027 पर ध्यान केंद्रित किया गया।
गौतम कुटीर में मंथन, मिशन 2027 पर चर्चा
मथुरा में चल रही आरएसएस की दस दिवसीय बैठक के दौरान सीएम योगी की संघ प्रमुख मोहन भागवत से यह मुलाकात पूर्व निर्धारित कार्ययोजना के तहत हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत ने पिछले लोकसभा चुनाव के परिणामों की समीक्षा की और भविष्य की रणनीति तय की। माना जा रहा है कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में कुछ जातियों की नाराजगी का सामना करना पड़ा, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। इसी पर चर्चा करते हुए जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई योजनाओं पर विचार किया गया।
मथुरा पर फोकस
बैठक में मथुरा को लेकर विशेष ध्यान दिया गया। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद मथुरा को अब भाजपा के फोकस में रखा जा रहा है। पार्टी की रणनीति में मथुरा को धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि आगामी चुनावों में इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाया जा सके।
जातिगत समीकरणों पर मंथन
लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में ठाकुर और अन्य जातियों के बीच नाराजगी की खबरें आई थीं, जिसका असर चुनाव परिणामों पर देखा गया। बैठक में इस जातिगत असंतोष को कैसे हल किया जाए, इस पर भी मंथन हुआ। इसके साथ ही कानून व्यवस्था और भाजपा शासित अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था के मॉडल को लागू करने पर भी चर्चा हुई।
कानून व्यवस्था पर चर्चा
बैठक में कानून व्यवस्था को लेकर संघ ने उत्तर प्रदेश सरकार की तारीफ की, लेकिन इस मॉडल को और सख्ती से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। संघ चाहता है कि उत्तर प्रदेश में जिस तरह से कानून व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है, उसे भाजपा शासित अन्य प्रदेशों में भी अपनाया जाए।
मिशन 2027 की तैयारी
मुख्यमंत्री योगी और मोहन भागवत की इस बैठक को मिशन 2027 की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान रणनीतिक चर्चा में जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा के लिए नई राहें प्रशस्त करने पर जोर दिया गया। योगी आदित्यनाथ के संघ से करीबी संबंधों को देखते हुए, आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा और संघ मिलकर काम करेंगे।
यह मुलाकात भाजपा और संघ के लिए आगामी चुनावों की रणनीति तैयार करने में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए आयाम जोड़ सकती है।