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बारामती में फिर रोचक मुकाबले की तैयारी! शरद पवार की चाल से क्या उलझेंगे अजित पवार, भतीजे से मिल सकती है चुनौती

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है, और महाराष्ट्र की राजनीति में हाल के वर्षों में आए बड़े बदलावों के बाद अब बारामती की सीट पर एक रोचक मुकाबले की तैयारी हो रही है। शरद पवार और अजित पवार के गढ़ माने जाने वाले बारामती में इस बार दोनों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।
युगेंद्र पवार से हो सकता है मुकाबला
हालांकि, शरद पवार की पार्टी की ओर से अभी आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन चर्चाएं जोरों पर हैं कि शरद पवार के पोते और अजित पवार के भाई श्रीनिवास पवार के बेटे, युगेंद्र पवार, इस बार बारामती से चुनाव लड़ सकते हैं। युगेंद्र पवार, जिन्होंने हाल ही में बारामती स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत की थी, लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्हें शरद पवार का पूरा समर्थन मिल रहा है।
चाचा-अजित पवार से मुकाबले के संकेत
हालांकि युगेंद्र पवार ने अब तक खुलकर अपने चाचा अजित पवार से मुकाबले की बात नहीं की है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया है कि अगर उन्हें मौका मिलता है, तो वह पीछे नहीं हटेंगे। यह देखा जा रहा है कि क्या शरद पवार की यह रणनीति अजित पवार के लिए राजनीतिक चुनौती बनेगी।
लोकसभा चुनाव में भी लगा था अजित पवार को झटका
बारामती की सीट पवार परिवार का गढ़ मानी जाती है, लेकिन हाल के लोकसभा चुनावों में अजित पवार को एक बड़ा झटका लगा था। इस सीट पर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उनकी ननद और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से हार का सामना करना पड़ा था। सुप्रिया सुले ने 1.50 लाख से ज्यादा मतों से जीत हासिल की थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि परिवार में भी प्रतिस्पर्धा चल रही है।
सीट बंटवारे की अंतिम बातचीत
महाराष्ट्र की राजनीतिक पृष्ठभूमि में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) और एनडीए के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस को 105, शिवसेना (यूबीटी) को 95, और शरद पवार की एनसीपी को 84 सीटें मिलने की संभावना है। दूसरी तरफ, एनडीए में भाजपा 150-155 सीटों पर, एकनाथ शिंदे की शिवसेना 78 सीटों पर और अजित पवार की एनसीपी 52-54 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
बारामती में नजरें टिकीं
अयोध्या के राम मंदिर की तरह, अब मथुरा पर राजनीतिक फोकस बढ़ रहा है। बारामती का चुनाव आगामी विधानसभा चुनावों का प्रमुख मुद्दा बन सकता है, और इस बात पर नजरें टिकी हैं कि शरद पवार की चाल अजित पवार के लिए कितनी बड़ी चुनौती साबित होती है।

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