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कर्नाटक: वक्फ बोर्ड के जमीन दावे पर सियासी विवाद, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के बयान से गरमाई राजनीति

बेंगलुरु: कर्नाटक में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के वक्फ बोर्ड को लेकर किए गए दावे ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। सूर्या का कहना है कि वक्फ बोर्ड ने राज्य के विजयपुरा जिले में किसानों की 1500 एकड़ जमीन पर दावा किया है। इस पर कांग्रेस सरकार के मंत्री एमबी पाटिल और दिनेश गुंडु राव ने भाजपा सांसद पर डर फैलाने का आरोप लगाया है।
‘भय का माहौल बनाना चाहते हैं तेजस्वी सूर्या’ – कांग्रेस
कांग्रेस मंत्री दिनेश गुंडु राव ने तेजस्वी सूर्या के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “तेजस्वी सूर्या हमेशा डर का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं ताकि उसका फायदा उठा सकें। जमीन संबंधी मामलों में सरकार कानूनी दस्तावेजों के आधार पर नोटिस जारी करती है। अगर जमीन किसानों की है तो किसी भी सूरत में उनसे नहीं छीनी जाएगी।”
मंत्री एमबी पाटिल का आश्वासन: ‘किसानों के साथ न्याय होगा’
विजयपुरा के प्रभारी मंत्री एमबी पाटिल ने इस मामले में स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने जिला अधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, “मैं किसानों से खुद बात करूंगा। अगर यह जमीन किसानों की है, तो उनसे एक इंच भी नहीं छीना जाएगा। जिले का प्रभारी होने के नाते, मेरी जिम्मेदारी है कि किसी के साथ अन्याय न हो।”
क्या है तेजस्वी सूर्या का दावा?
तेजस्वी सूर्या ने आरोप लगाया है कि विजयपुरा जिले के तिकोता तालुका के होनवाड़ा गांव के किसानों को नोटिस मिला है, जिसमें उनकी जमीन को वक्फ संपत्ति बताया गया है, लेकिन कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के मंत्री बीजेड जमीर अहमद खान ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 15 दिनों में इस जमीन को वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज किया जाए।
केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा जारी
तेजस्वी सूर्या ने वक्फ बोर्ड के कार्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वक्फ संपत्ति पर दावा किए जाने से कई किसानों में भय का माहौल है। वहीं, केंद्र सरकार वक्फ संशोधन विधेयक लेकर आई है, जिस पर संसद की संयुक्त समिति में चर्चा हो रही है। इस संशोधन को लेकर कई राज्यों में जमीन के विवाद बढ़े हैं, जिसका प्रभाव कर्नाटक में भी देखा जा रहा है।
विजयपुरा में वक्फ बोर्ड द्वारा किसानों की जमीन पर दावे को लेकर राज्य में राजनीति गरमा गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं, जबकि किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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