निर्भया जैसी दरिंदगी: झाड़ियों में खींचा, शरीर को नोचा; समाज सेवा करने आई युवती को मिला जिंदगी भर का दर्द
दिल्ली में वसंत विहार निर्भया कांड जैसा एक और जघन्य अपराध हुआ। दिल्ली पुलिस के पुराने मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर, महिलाओं और गरीबों के लिए काम करने आई युवती के साथ तीन दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद ऑटो चालक ने उसे राजघाट के पास गांधी स्मृति की सर्विस रोड पर ले जाकर दुबारा उसके साथ बर्बरता की। बार-बार हुए इस घृणित अपराध से पीड़िता का मानसिक संतुलन बिगड़ गया।
दिल्ली में मास्टर इन सोशल वर्क की डिग्री होल्डर युवती को समाज सेवा के लिए दिल्ली में बुलाया गया था। ओडिशा से आई इस पीड़िता ने अपने करियर की शुरुआत नर्सिंग से की थी और वह गरीबों, महिलाओं और वंचित समुदायों के लिए काम करने के उद्देश्य से यहां आई थी। हालांकि, दिल्ली ने उसे जीवनभर का घाव दिया।
घटना की जानकारी:
पीड़िता पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्रतीक्षा कक्ष में कुछ समय से रह रही थी। 10 और 11 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे वह आईटीओ पहुंची, जहां आरोपी प्रमोद और शमशुल ने उसे झाड़ियों में खींचकर ले जाने की कोशिश की। तभी ऑटो चालक प्रभु वहां आ गया, और तीनों ने मिलकर उस युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
इसके बाद, ऑटो चालक प्रभु उसे ऑटो में लेकर फिरोशाह कोटला किले के पास ले गया और वहां भी उसके साथ घिनौनी हरकतें की। इसके बाद आरोपी उसे अर्धनग्न अवस्था में छोड़कर भाग गए।
घटनास्थल से गुजरते रहे लोग, मगर किसी ने नहीं की मदद:
युवती खून से लथपथ और अर्धनग्न अवस्था में राजघाट से पैदल सराय काले खां तक पहुंची, लेकिन रिंग रोड से गुजर रहे हजारों वाहनों में से किसी ने उसकी मदद नहीं की। आखिरकार एक नौसेना के अधिकारी ने युवती को देखकर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद एम्स में उसके इलाज की व्यवस्था की गई।
पुलिस की मेहनत से आरोपियों की गिरफ्तारी:
करीब 21 दिन की मेहनत के बाद पुलिस ने ऑटो चालक प्रभु, कबाड़ दुकान पर काम करने वाले प्रमोद और शमशुल लगड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उपायुक्त रवि कुमार सिंह ने इन आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। महिला सिपाही संगीता ने पीड़िता से मिलकर सोशल वर्कर के रूप में उससे बयान लिया, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सनी सलवार और प्रभु का ऑटो भी बरामद कर लिया है।
परिजन आए, पर युवती नहीं जाना चाहती:
इस दर्दनाक घटना के बाद, पीड़िता के परिजन उसे वापस ओडिशा ले जाने के लिए दिल्ली आए, लेकिन वह वापस जाने को तैयार नहीं है।