धर्म

लोक आस्था का महापर्व छठ: डूबते सूर्य को अर्घ्य आज, उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ कल होगा समापन

हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में मनाए जाने वाले लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा इस बार 4 दिन की परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। मंगलवार को नहाय-खाय के साथ इस पर्व की शुरुआत हुई, और बुधवार को खरना का प्रसाद बना। आज, गुरुवार, को छठ पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन है जब श्रद्धालु डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे, और शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह महापर्व संपन्न होगा।

घाटों पर तैयारियां पूरी, श्रद्धालुओं का जमावड़ा

दिल्ली के यमुना घाट से लेकर बिहार के पटना, बक्सर, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मुंगेर और वाराणसी तक के गंगा घाटों पर छठ व्रतियों का पहुंचना जारी है। जगह-जगह अस्थायी घाट और तालाबों में भी पूजा की जा रही है। बिहार की राजधानी पटना के गंगा घाट, दिल्ली के यमुना घाट और अन्य स्थानों पर अर्घ्य के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। दिल्ली सरकार ने इस साल 1000 आर्टिफिशियल छठ घाट बनाए हैं, क्योंकि यमुना के प्रदूषण के कारण हाईकोर्ट ने यहां छठ पूजा की अनुमति नहीं दी।

सुरक्षा और मेडिकल इंतजाम

बिहार में छठ पर्व के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पटना जिला प्रशासन ने गंगा के किनारे 100 से अधिक घाटों पर सुरक्षा और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की है। पटना के कच्ची तालाब, गर्दनीबाग तालाब, मानिकचंद तालाब, और अनीसाबाद समेत कई घाटों पर सुरक्षा और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं।

यूपी, दिल्ली, और अन्य शहरों में छठ पूजा का आयोजन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मिर्जापुर, लखनऊ, और नोएडा में भी विभिन्न स्थानों पर छठ पूजा की व्यवस्था की गई है। नोएडा के सेक्टर-21A स्टेडियम, सेक्टर 31, 71, और अन्य स्थानों पर छठ पूजा के आयोजन किए गए हैं। इसके अलावा लखनऊ के गोमती घाट और अन्य स्थानों पर सुरक्षा की व्यवस्था की गई है।

संध्या और उषा अर्घ्य का समय

  • संध्या अर्घ्य: 7 नवंबर, शाम 5:31 बजे तक
  • उषा अर्घ्य: 8 नवंबर, सुबह 6:38 बजे तक

शहरवार सूर्यास्त का समय (संध्या अर्घ्य)

  • नई दिल्ली: 5:28 बजे
  • पटना: 5:04 बजे
  • कोलकाता: 4:56 बजे
  • मुंबई: 6:02 बजे
  • लखनऊ: 5:19 बजे

छठ माता की पूजा का महत्व

शास्त्रों में छठ माता को सूर्य देवता की बहन माना गया है, जो संतान की रक्षा करती हैं। इस महापर्व पर सूर्य देव और छठ माता की पूजा की जाती है, और लोग अपने परिवार की खुशहाली और संतान की सुरक्षा के लिए यह कठिन व्रत करते हैं।

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