झारखंड विधानसभा चुनाव का पहला चरण 13 नवंबर को होगा, जिसमें कोल्हान क्षेत्र के मतदान पर विशेष नजर है। इस क्षेत्र में पिछले चुनाव में बीजेपी का खाता भी नहीं खुला था, जो उसके लिए चिंता का विषय है। इस बार कोल्हान में बीजेपी ने अपनी रणनीति को मजबूत करते हुए, बड़े नेताओं की रैलियां, क्षेत्रीय मुद्दे और कोल्हान के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ मिलाने पर जोर दिया है।
कोल्हान की राजनीतिक स्थिति
कोल्हान क्षेत्र में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला खरसावा जिलों की 14 विधानसभा सीटें शामिल हैं, जिनमें से 9 सीटें अनुसूचित जनजाति और एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। 2019 के चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने यहां 11 सीटों पर कब्जा किया था, कांग्रेस ने 2 और एक निर्दलीय ने जीत हासिल की थी। बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, यहां तक कि मुख्यमंत्री रघुवर दास भी अपनी सीट निर्दलीय सरयू राय से हार गए थे। इस बार बीजेपी ने कोल्हान की स्थिति को सुधारने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार और दौरे किए हैं।
बीजेपी की रणनीति और कोल्हान के प्रमुख चेहरे
इस बार चुनाव में कोल्हान को जीतने के लिए बीजेपी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की रैलियों का आयोजन किया है। बीजेपी ने क्षेत्र के लोकप्रिय नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को पार्टी में शामिल किया है, जिन्हें कोल्हान टाइगर के नाम से जाना जाता है। उनके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा को भी बीजेपी में लाकर उम्मीदवार बनाया गया है।
मुख्य मुद्दे और बदलाव
बीजेपी ने इस बार भ्रष्टाचार, घुसपैठ, धार्मिक मुद्दों और बेरोजगारी को चुनावी मुद्दा बनाया है। पार्टी ने इस क्षेत्र में उम्मीदवार बदलने का भी निर्णय लिया है और नये चेहरों को मौका दिया है, जिनमें क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं और दूसरे दलों से आए नेताओं के रिश्तेदार शामिल हैं। कोल्हान में बीजेपी की सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन तीन और जनता दल (यूनाइटेड) एक सीट पर चुनाव लड़ रही है।
झारखंड में कुल राजनीतिक परिदृश्य
झारखंड में राजनीति आम तौर पर पांच प्रमुख क्षेत्रों में बंटी है: पलामू, संथाल परगना, उत्तरी छोटानागपुर, दक्षिण छोटानागपुर, और कोल्हान। 2019 के चुनाव में बीजेपी को कोल्हान में केवल 30.1% वोट मिले थे, जबकि जेएमएम प्लस गठबंधन को 42.7% वोट प्राप्त हुए थे। अन्य दलों को 27.2% वोट मिले थे। इस बार बीजेपी ने कोल्हान को जीतने के लिए विशेष तैयारी की है, ताकि राज्य की सत्ता में वापसी का रास्ता मजबूत हो सके।