उत्तर प्रदेश

संभल हिंसा: सपा का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जाने को तैयार, प्रशासन ने नहीं दी इजाजत

संभल में जामा मस्जिद परिसर में सर्वे के दौरान भड़की हिंसा को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज संभल जाना चाहता था, लेकिन जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है, और कई सपा नेताओं के घरों के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं।

सपा नेता प्रशासन के खिलाफ नाराज़

सपा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे जब संभल जाने की तैयारी कर रहे थे, तो पुलिस ने उनकी गाड़ी के रास्ते को अवरुद्ध कर दिया। माता प्रसाद पांडे ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर निषेधाज्ञा संभल में है, तो मुझे लखनऊ में क्यों रोका जा रहा है? यह प्रशासन की विफलता है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रही है।

अखिलेश यादव का BJP पर हमला

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर ट्वीट करते हुए लिखा,
“संभल में हिंसा रोकने में सरकार विफल रही है। प्रतिबंध लगाकर प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश कर रहा है। संभल के प्रशासनिक अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

हिंसा में 4 मौतें, तनाव बरकरार

19 नवंबर को अदालत के आदेश पर जामा मस्जिद का सर्वे कराया गया, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद की जगह पहले हरिहर मंदिर था। 24 नवंबर को मस्जिद के दोबारा सर्वे के दौरान तनाव हिंसा में बदल गया। इस झड़प में 4 लोगों की मौत हुई और 25 अन्य घायल हो गए।

कांग्रेस भी मैदान में

सपा के बाद कांग्रेस ने भी इस मामले में कदम उठाया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि 2 दिसंबर को कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल संभल का दौरा करेगा और घटना की रिपोर्ट तैयार करेगा।

सपा का प्रतिनिधिमंडल

सपा ने अपने 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सूची साझा की है, जिसमें प्रमुख नाम शामिल हैं:

  • नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे
  • विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव
  • प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल
  • सांसद जियाउर्रहमान बर्क, हरेंद्र मलिक और रुचि वीरा
  • विधायक कमाल अख्तर, रविदास मेहरोत्रा और नवाब इकबाल महमूद

जियाउर्रहमान बर्क पर FIR दर्ज

हिंसा मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ भड़काऊ बयान देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

प्रशासन सतर्क

संभल जिला प्रशासन ने 30 नवंबर तक बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। पुलिस और प्रशासन हालात पर कड़ी नजर रख रहे हैं। सपा और कांग्रेस के बयानों के बीच, यह मुद्दा राज्य की सियासत में बड़ा मोड़ लेता दिख रहा है।

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