वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के पार्किंग एरिया में शुक्रवार-शनिवार की रात को आग लगने से 300 से ज्यादा बाइकें जलकर खाक हो गईं। आग की लपटें इतनी भीषण थीं कि पार्किंग क्षेत्र में खड़ी कई बाइक पूरी तरह जल गईं, जबकि कई को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर लिया गया। आग की वजह से रेलवे कर्मचारियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, क्योंकि सबसे ज्यादा दो पहिया वाहन रेलवे कर्मचारियों के ही थे।
पेट्रोल चोरी से जुड़ा हो सकता है मामला
बताया जा रहा है कि पार्किंग में खड़ी बाइक से पेट्रोल चोरी की घटनाएं पहले भी हो चुकी थीं, और लोगों का मानना है कि पेट्रोल चोरी के दौरान ही आग लगने की संभावना है। छह दिन पहले भी इसी पार्किंग एरिया में एक बाइक में आग लग गई थी, जिसे तेल चोरी की घटना से जोड़ा गया था। हालांकि, रेल प्रशासन ने इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, और उसकी अनदेखी के कारण यह बड़ी दुर्घटना घटी।
आग पर काबू पाने की कोशिशें नाकाम
आग इतनी विकराल थी कि कोई भी आग के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने बड़ी मुश्किल से आग की चपेट में आईं 30 से ज्यादा बाइक को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। हालांकि, आग की चपेट में कई बाइकें पूरी तरह जल गईं। कैंट रेलवे स्टेशन के सुरक्षा अधिकारी और उनके साथियों ने अथक प्रयास किया, लेकिन फायर फाइटिंग सिस्टम काम नहीं आया। बल्कि आग बढ़ते ही चली गई और इससे स्टेशन पर भारी नुकसान हुआ।
पार्किंग में सुरक्षा इंतजामों की कमी
आग बुझाने के लिए रेलवे कर्मचारियों ने बाल्टी में पानी भरकर आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। समय पर फायर फाइटिंग सिस्टम की मदद भी नहीं मिल पाई, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया।
रेलवे ने शुरू की जांच
इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। पेट्रोल चोरी के आरोपों की भी जांच की जा रही है, क्योंकि पार्किंग से अक्सर तेल चोरी की शिकायतें मिलती रही थीं। रेल कर्मचारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, इस हादसे में एक अच्छी बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई।
नुकसान और इसके असर
इस दुर्घटना में सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे कर्मचारियों का हुआ, क्योंकि पार्किंग में खड़ी बाइकें अधिकांशतः उन्हीं की थीं। रेलवे प्रशासन इस हादसे के कारणों की जांच कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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