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महाराष्ट्र: विपक्षी एकता पर शिवसेना (UBT) की कांग्रेस से अपील, केजरीवाल को मनाने की सलाह

मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मंगलवार को कांग्रेस से आग्रह किया कि वह आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मनाने के लिए कदम उठाए, ताकि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की एकता बनी रहे।
शिवसेना (UBT) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय के माध्यम से यह चिंता व्यक्त की कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का निर्णय लिया है, जिससे विपक्षी एकता कमजोर हो सकती है। पार्टी ने कांग्रेस को आत्ममंथन करने और ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं के साथ सहयोग बनाए रखने के लिए ठोस प्रयास करने की सलाह दी।
केजरीवाल को मनाने की जरूरत पर जोर
संपादकीय में कहा गया:
“पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी कांग्रेस को अलग रखते हुए अपनी राजनीति कर रही हैं। अब अरविंद केजरीवाल भी वही रास्ता अपना रहे हैं। कांग्रेस को इस पर आत्मचिंतन करने की जरूरत है और विपक्षी गठबंधन की मजबूती के लिए प्रयास करना चाहिए।”
शिवसेना (UBT) ने यह भी कहा कि अगर आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में अकेले उतरती है, तो इसका असर अन्य राज्यों में भी पड़ सकता है। कांग्रेस को इसे रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
‘आप’ का क्षेत्रीय से राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
संपादकीय में आम आदमी पार्टी की सफलता की सराहना करते हुए कहा गया कि दिल्ली में किए गए कार्यों के कारण पार्टी पंजाब में कांग्रेस को हराने में सफल रही। पार्टी ने अब दिल्ली और पंजाब के बाहर भी अपनी पहुंच बनाई है।
“आम आदमी पार्टी अब केवल एक क्षेत्रीय दल नहीं है। भाजपा के खिलाफ गठबंधन में इसका होना बेहद जरूरी है,” संपादकीय में लिखा गया।
लोकसभा चुनाव और गठबंधन का महत्व
‘सामना’ ने सुझाव दिया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में गठबंधन करना चाहिए।
संपादकीय में कहा गया:
“अगर कांग्रेस और आप मिलकर चुनाव लड़ें, तो यह भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकता है। गुजरात में विशेष तौर पर दोनों पार्टियों को साथ काम करना चाहिए, ताकि राज्य में विपक्ष को मजबूत किया जा सके।”
विपक्षी एकता की अहमियत
शिवसेना (UBT) का यह बयान उस वक्त आया है जब विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। लेकिन क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच मतभेद इसे कमजोर कर सकते हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस पर क्या कदम उठाती है और विपक्षी एकता बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।

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