8 साल बाद जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित मुख्यमंत्री ने फहराया तिरंगा

जम्मू-कश्मीर में इस साल का स्वतंत्रता दिवस ऐतिहासिक बन गया, क्योंकि लगभग आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी निर्वाचित मुख्यमंत्री ने आधिकारिक समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में तिरंगा फहराया और समारोह की अध्यक्षता की। यह अवसर उन्हें स्वतंत्रता दिवस समारोह की अध्यक्षता करने वाले पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में यादगार बना गया।
इससे पहले 2017 में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने आखिरी बार बतौर मुख्यमंत्री ध्वजारोहण किया था। 2018 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया, जिससे गठबंधन सरकार गिर गई और राज्यपाल शासन लागू हो गया। इसके बाद 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने तक जम्मू-कश्मीर का प्रशासन केंद्र या राज्यपाल के हाथ में रहा।

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। इसके चलते लंबे समय तक यहां कोई निर्वाचित सरकार नहीं रही। 2020 से 2024 तक स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर उपराज्यपाल ध्वजारोहण करते रहे। पिछले साल के अंत में हुए विधानसभा चुनावों के बाद उमर अब्दुल्ला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री बने।
बख्शी स्टेडियम में आयोजित इस वर्ष के समारोह में मुख्यमंत्री को परेड में भाग लेने वाली टुकड़ियों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और स्कूली बच्चों की टुकड़ियों का निरीक्षण किया और सलामी ली। वहीं, उनके कैबिनेट सहयोगियों ने राज्य के अन्य प्रमुख जिला मुख्यालयों में स्वतंत्रता दिवस समारोह की अध्यक्षता की।
इस अवसर पर होने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम इस बार आयोजित नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने यह निर्णय किश्तवाड़ में हाल ही में आई बाढ़ में मारे गए लोगों के प्रति सम्मान और शोक प्रकट करने के लिए लिया।
यह ध्वजारोहण न केवल एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम था, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक व्यवस्था की वापसी का भी प्रतीक बना। लंबे राजनीतिक ठहराव और संवैधानिक बदलावों के बाद, एक निर्वाचित मुख्यमंत्री द्वारा तिरंगा फहराना राज्य की राजनीति में एक नई शुरुआत का संकेत देता है।



