अयोध्या, 1 अक्टूबर 2024 – अयोध्या में दलित नाबालिग लड़की से जुड़े गैंगरेप मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मामले के मुख्य आरोपी, समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान का डीएनए, पीड़िता के भ्रूण से मेल नहीं खा रहा है। इस नए खुलासे के बावजूद, मोईद खान पर लगे आरोप पूरी तरह से खारिज नहीं हुए हैं। यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस केस में सह-आरोपी, बेकरी कर्मचारी राजू का डीएनए पीड़िता के भ्रूण से मैच कर गया है।
रिपोर्ट का असर और राजनीतिक विवाद
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि मोईद खान को राजनीतिक कारणों से इस मामले में फंसाया जा रहा है। वहीं, मोईद खान की ओर से भी दलील दी गई है कि वह 71 साल के बुजुर्ग हैं और उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के चलते इस मामले में फंसाया गया है।
क्या DNA मैच ना होने से मोईद खान को राहत मिलेगी?
हालांकि, डीएनए रिपोर्ट के आधार पर मोईद खान को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन योगी सरकार के अपर महाधिवक्ता विनोद शाही का कहना है कि इससे मोईद खान के खिलाफ लगे आरोप कमजोर नहीं होते। शाही ने अदालत में बताया कि गैंगरेप के मामलों में पीड़िता के भ्रूण का डीएनए सिर्फ एक आरोपी से ही मेल खा सकता है, और इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे आरोपियों की संलिप्तता कम हो जाती है।
अदालत में अगली सुनवाई की तारीख
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में मोईद अहमद की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए भ्रूण के डीएनए परीक्षण के आदेश दिए थे। अब जबकि डीएनए रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जा चुकी है, मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
आपको बता दें कि 30 जुलाई को यूपी पुलिस ने अयोध्या के पुरा कलंदर क्षेत्र से बेकरी मालिक मोईद अहमद और उसके कर्मचारी राजू को गिरफ्तार किया था। उन पर 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ रेप करने का आरोप है। इस आरोप के तहत, पीड़िता गर्भवती हो गई थी, जिसके बाद उसका गर्भपात कराया गया। मामले में पीड़िता ने दोनों आरोपियों पर रेप का आरोप लगाया है, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
डीएनए रिपोर्ट से भले ही नए सवाल खड़े हो गए हों, लेकिन सरकार और न्यायपालिका की ओर से मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, आगे की कार्रवाई की जा रही है। मोईद अहमद को अभी जमानत नहीं मिली है और इस मामले में आरोपों की पूरी जांच जारी है। यह मामला अयोध्या के सामुदायिक और राजनीतिक परिदृश्य को भी प्रभावित कर रहा है। समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को सरकार पर दबाव बनाने के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जबकि सरकार का रुख अब भी सख्त बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि 3 अक्टूबर को अदालत में मोईद अहमद की जमानत याचिका पर क्या फैसला आता है।