
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क (डीएफ हिंदी)
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान” की जमीनी हकीकत ने एक बार फिर प्रशासनिक और बैंकिंग तंत्र की सुस्ती उजागर कर दी है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में बैंकों की लापरवाही खुलकर सामने आई, जिस पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई।
निर्यात भवन में आयोजित इस बैठक में लखनऊ, अयोध्या और देवीपाटन मंडल की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। आंकड़ों ने साफ किया कि कई निजी बैंक योजना के तहत अपने लक्ष्य तक पहुंचना तो दूर, शून्य प्रगति पर खड़े हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार लगातार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के दावे कर रही है।
मंत्री सचान ने साफ शब्दों में कहा कि जो बैंक सरकारी योजनाओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। उन्होंने यहां तक चेतावनी दे डाली कि जरूरत पड़ी तो ऐसे बैंकों से सरकारी योजनाओं से जुड़े खाते भी हटा दिए जाएंगे। यह बयान इस बात का संकेत है कि सरकार अब लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
बैठक में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में आवेदन लंबित पड़े हैं, जिन पर न तो समय पर स्वीकृति दी जा रही है और न ही वितरण हो पा रहा है। इस पर मंत्री ने 18 और 25 मार्च को आयोजित होने वाले बैंक कैंपों में हर हाल में लंबित मामलों के निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों को स्पष्ट कर दिया कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
“टॉप टू बॉटम अप्रोच” की बात करते हुए मंत्री ने बैंकों को खुद आगे बढ़कर पात्र युवाओं की पहचान करने और उन्हें योजना से जोड़ने का निर्देश दिया। लेकिन सवाल यह है कि जब मौजूदा आवेदनों का ही निस्तारण नहीं हो पा रहा, तो नई पहल कितनी प्रभावी होगी।
सरकार भले ही युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर बैंकिंग तंत्र की सुस्ती इस योजना की रफ्तार पर ब्रेक लगाती नजर आ रही है।



