
कार्यशाला में दावे बड़े, जमीनी हकीकत कमजोर
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क | डीएफ हिंदी
Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises द्वारा आयोजित एमएसएमई ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल की पहली राष्ट्रीय कार्यशाला ने एक बार फिर सिस्टम की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां मंच से त्वरित, सस्ता और तकनीकी समाधान देने के बड़े-बड़े दावे किए गए, वहीं जमीनी स्तर पर छोटे उद्यमों की परेशानियां अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
कार्यशाला में उद्योग संघों, कानूनी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया, लेकिन चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि एमएसएमई सेक्टर में सबसे बड़ी समस्या — विलंबित भुगतान और लंबित विवाद — आज भी व्यापक स्तर पर कायम है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब समस्याएं बरकरार हैं, तो क्या केवल पोर्टल लॉन्च और कार्यशालाओं से समाधान संभव है?
एमएसएमई सचिव S. C. L. Das ने केंद्र-राज्य समन्वय और सामूहिक जिम्मेदारी की बात जरूर की, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन तंत्रों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जाता, तब तक छोटे उद्यमों को राहत मिलना मुश्किल है।
प्रतिभागियों ने यह स्वीकार किया कि ODR पोर्टल समय और लागत कम करने में सक्षम हो सकता है, लेकिन इसकी पहुंच, जागरूकता और उपयोगिता अभी भी सीमित है। कई छोटे व्यवसायों को इसकी जानकारी तक नहीं है, जिससे इसका वास्तविक प्रभाव संदिग्ध बना हुआ है।
कार्यशाला के अंत में भले ही ODR को बढ़ावा देने पर सहमति बनी हो, लेकिन असल चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की है। जब तक यह पोर्टल हर छोटे उद्यम तक नहीं पहुंचेगा और विवादों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित नहीं करेगा, तब तक यह पहल कागजों से बाहर निकलकर जमीनी बदलाव नहीं ला पाएगी।


