बिहार

पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: BPSC परीक्षा दोबारा कराने की मांग खारिज

पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में 70वीं बीपीएससी सिविल प्रारंभिक परीक्षा को दोबारा कराने की मांग को खारिज कर दिया। इस फैसले से राज्य सरकार और बीपीएससी को बड़ी राहत मिली है। वहीं, उन अभ्यर्थियों को झटका लगा है जो परीक्षा रद्द कर पुनः आयोजन की मांग कर रहे थे।

क्या है मामला?

13 दिसंबर 2024 को आयोजित बीपीएससी सिविल प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता हुई है और इसके कारण परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की जानी चाहिए। इसे लेकर छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और अदालत का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट का फैसला

पटना हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे शुक्रवार को सुनाया गया। अदालत ने याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि परीक्षा दोबारा नहीं होगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान

शिक्षक नेता गुरु रहमान ने हाईकोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे और सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उन्होंने कहा कि न्याय के लिए लड़ाई जारी रहेगी। कई अन्य छात्रों ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है।

परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी के आरोप

बीपीएससी ने विवाद के बाद 4 जनवरी 2025 को पटना के बापू परीक्षा केंद्र पर दोबारा परीक्षा आयोजित की थी। लेकिन इस पर भी अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। छात्रों ने कहा कि परीक्षा के आयोजन में पारदर्शिता का अभाव था, जिसके कारण विवाद बढ़ता गया।

परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर पटना की सड़कों पर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने भी छात्रों का समर्थन किया और भूख हड़ताल पर बैठे। कई अन्य सामाजिक संगठनों और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों ने भी आंदोलन में भाग लिया।

फैसले के बाद छात्रों में नाराजगी है, और अब वे सुप्रीम कोर्ट में न्याय की गुहार लगाने की तैयारी कर रहे हैं। उधर, सरकार और बीपीएससी ने राहत की सांस ली है। अदालत के आदेश के बाद अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

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