शिविरों के दावे बड़े, रोजगार पर सवाल
आंकड़ों की चमक, जमीनी हकीकत धुंधली🔻 हेडलाइन 2: शिविरों के दावे बड़े, रोजगार पर सवाल🔻 हेडलाइन 3: निर्देशों की भरमार, क्रियान्वयन फिर भी अधूरा

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क (डीएफ हिंदी)
उद्योग स्थायी समिति की तृतीय बैठक में सरकार ने जहां योजनाओं की उपलब्धियां गिनाईं, वहीं जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल भी खड़े हो गए। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आंकड़ों के जरिए प्रगति दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन वास्तविक असर को लेकर स्पष्टता का अभाव नजर आया।
बैठक में बताया गया कि 87 तहसीलों में 165 शिविर लगाकर 12,959 युवाओं को योजना से जोड़ा गया है। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि इनमें से कितनों को वास्तविक वित्तीय सहायता मिली और कितने युवाओं का स्वरोजगार वास्तव में शुरू हो सका। ऐसे में आंकड़ों की यह प्रस्तुति सिर्फ कागजी प्रगति तक सीमित नजर आती है।
मंत्री सचान ने बैंकों को योजनाओं में सहयोग देने और लाभार्थियों को बिना बाधा लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए, लेकिन इससे पहले की बैठकों में भी बैंकिंग तंत्र की सुस्ती सामने आ चुकी है। बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार न होना प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है।
औद्योगिक पार्क और एमएसएमई विकास को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई, लेकिन भूमि उपलब्धता और बुनियादी ढांचे की समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं। “सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एवं इम्प्लॉयमेंट जोन” जैसी योजनाएं अभी शुरुआती चरण में ही अटकी हुई हैं, जिससे निवेश और रोजगार सृजन की गति प्रभावित हो रही है।
सरकार पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन की बात कर रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को जानकारी उपलब्ध कराने और बैठकों में बुलाने जैसे निर्देश इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अब तक समन्वय में कमी रही है।
युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर ठोस परिणाम सामने नहीं आने से इन योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना लाजिमी है।



