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अदाणी पावर के कॉन्ट्रैक्ट के खिलाफ दायर याचिका को बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिन्यूएबल और थर्मल पावर इलेक्ट्रिसिटी के लिए अदाणी ग्रुप को महाराष्ट्र सरकार से दिए गए कॉन्ट्रैक्ट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह कॉन्ट्रैक्ट महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) के साथ था। याचिकाकर्ता ने यह आरोप लगाया था कि अदाणी पावर द्वारा किया गया अनुबंध शर्तों के खिलाफ था और सार्वजनिक हित में हानिकारक था। कोर्ट ने याचिका को अप्रमाणित और लापरवाह करार दिया है। दो न्यायाधीश की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता श्रीराज नागेश्वर एपुरवार पर अस्पष्ट याचिका के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

मामला तब सामने आया जब MSEDCL और अदाणी पावर के बीच बिजली आपूर्ति और उसके मूल्य निर्धारण को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। श्रीराज नागेश्वर एपुरवार ने आरोप लगाया कि 6,600 मेगावाट रिन्यूएबल और थर्मल पावर इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई के लिए अदाणी ग्रुप को दिया गया कॉन्ट्रैक्ट याचिकाकर्ता के उचित दर पर उचित बिजली सप्लाई तक पहुंच के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि इस अनुबंध को रद्द किया जाए क्योंकि इसके तहत बिजली की दरें बहुत अधिक थीं, जो राज्य के उपभोक्ताओं के लिए अनुचित थीं। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह अनुबंध राज्य के वित्तीय हितों के खिलाफ था और इसने प्रतियोगिता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया था।

याचिका में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, जो वर्तमान में उपमुख्यमंत्री हैं, पर अदाणी ग्रुप को कॉन्ट्रैक्ट देने के दौरान भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। दो जजों की पीठ ने याचिकाकर्ता की इन दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा, हमारी राय में, निराधार और लापरवाह बयानों वाली ऐसी याचिकाएं दायर करने से कभी-कभी अच्छे कारणों के भी खत्म होने का खतरा रहता है। याचिका में अस्पष्ट और निराधार दावे किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कॉन्ट्रैक्ट की निविदा प्रक्रिया में भागीदार नहीं था। याचिका में कोई भी पुष्ट और सहायक कंटेंट नहीं है और इसमें बिल्कुल बेबुनियाद और अस्पष्ट आरोप हैं।

हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए यह माना कि अनुबंध की शर्तें कानूनी और उचित थीं। अदालत ने कहा कि इसमें कोई ऐसी बात नहीं थी जो सार्वजनिक हित या कानून के खिलाफ हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने पर्याप्त प्रमाण नहीं पेश किए थे, जो यह साबित कर सके कि अनुबंध में कोई गड़बड़ी या अपारदर्शिता थी।

इस फैसले के बाद अदाणी पावर को एक बड़ी राहत मिली, क्योंकि यह फैसला उनके पक्ष में आया और उन्हें यह पुष्टि मिली कि उनका अनुबंध वैध था। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुबंधों की वैधता और उनकी शर्तों पर अदालत का निर्णय सामान्य रूप से राज्य और कंपनियों के बीच व्यापारिक मामलों को लेकर होता है, बशर्ते वह किसी नियम या कानून का उल्लंघन न करते हों।

इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि अदाणी पावर और MSEDCL के बीच का अनुबंध इस समय वैध और प्रभावी बना रहेगा, और इस मुद्दे पर कोई और कानूनी विवाद या रुकावट उत्पन्न होने की संभावना कम है।

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