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	<title>प्रयागराज - Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</title>
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	<title>प्रयागराज - Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</title>
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		<title>स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर सवाल: एमओयू से क्या बदलेगी जमीनी हकीकत?:</title>
		<link>https://nishchaytimes.com/questions-raised-over-healthcare-claims-as-ai-icu-plan-announced-in-prayagraj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nishchay Times]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 06:19:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रयागराज]]></category>
		<category><![CDATA[#UPHealth #PrayagrajHospitals #HealthcareCrisis #AIHealthcare #NishchayTimes]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>1.4 करोड़ आबादी के लिए योजना, पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क, डीएफ हिंदी प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे के बीच प्रयागराज में दो सरकारी अस्पतालों और सैन्य अस्पताल के बीच एमओयू साइन किए जाने की घोषणा हुई है। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://nishchaytimes.com/questions-raised-over-healthcare-claims-as-ai-icu-plan-announced-in-prayagraj/">स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर सवाल: एमओयू से क्या बदलेगी जमीनी हकीकत?:</a> first appeared on <a href="https://nishchaytimes.com">Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</a>.</p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>1.4 करोड़ आबादी के लिए योजना, पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती</p>



<p><strong>निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क, डीएफ हिंदी</strong></p>



<p>प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे के बीच प्रयागराज में दो सरकारी अस्पतालों और सैन्य अस्पताल के बीच एमओयू साइन किए जाने की घोषणा हुई है। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री Brajesh Pathak ने इसे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण इलाज की दिशा में बड़ा कदम बताया है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समझौता पत्रों से जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आना आसान नहीं होगा।</p>



<p>जानकारी के अनुसार प्रयागराज के Tej Bahadur Sapru Hospital और Motilal Nehru Divisional Hospital में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुपर स्पेशियलिटी आईसीयू स्थापित करने के लिए Cantonment General Hospital के साथ एमओयू किया गया है। दावा किया जा रहा है कि इससे क्रिटिकल केयर, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी।</p>



<p>हालांकि जमीनी स्तर पर सरकारी अस्पतालों की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश जिला अस्पतालों में आज भी पर्याप्त डॉक्टर, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी बनी हुई है। ऐसे में एआई आधारित आईसीयू और टेलीमेडिसिन जैसी उन्नत तकनीक को लागू करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।</p>



<p>सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से प्रयागराज मंडल की लगभग 1.4 करोड़ आबादी को लाभ मिलेगा, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी आबादी के लिए केवल दो अस्पतालों में सुविधाएं शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा।</p>



<p>योजना के तहत टेलीमेडिसिन मॉडल के माध्यम से निजी अस्पतालों और विशेषज्ञों से समन्वय की बात भी कही गई है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों की मौजूदा व्यवस्था में मरीजों को बेसिक जांच और समय पर इलाज तक के लिए संघर्ष करना पड़ता है।</p>



<p>ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह एमओयू वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम साबित होगा या फिर यह भी सरकारी घोषणाओं की लंबी सूची में एक और जोड़ बनकर रह जाएगा।</p><p>The post <a href="https://nishchaytimes.com/questions-raised-over-healthcare-claims-as-ai-icu-plan-announced-in-prayagraj/">स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर सवाल: एमओयू से क्या बदलेगी जमीनी हकीकत?:</a> first appeared on <a href="https://nishchaytimes.com">Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</a>.</p>]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस ने आज़म खान के सभी मामलों की सुनवाई से खुद को अलग किया</title>
		<link>https://nishchaytimes.com/allahabad-high-court-justice-recuses-himself-from-hearing-all-azam-khan-cases/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nishchay Times]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 06:39:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रयागराज]]></category>
		<category><![CDATA[AllahabadHighCourt]]></category>
		<category><![CDATA[AzamKhanCase]]></category>
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		<category><![CDATA[YateemkhanaCase]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट में शुक्रवार को एक बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला, जब न्यायमूर्ति समीर जैन ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इनमें वर्षों से चल रहा 2016 का चर्चित यतीमखाना (अनाथालय) बेदखली &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="311" data-end="641"><strong>प्रयागराज:</strong> इलाहाबाद हाई कोर्ट में शुक्रवार को एक बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला, जब न्यायमूर्ति समीर जैन ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इनमें वर्षों से चल रहा 2016 का चर्चित <em data-start="594" data-end="628">यतीमखाना (अनाथालय) बेदखली प्रकरण</em> भी शामिल है।</p>
<p data-start="643" data-end="959">जानकारी के अनुसार, यह मामला अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। लेकिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही जस्टिस जैन ने खुले कोर्ट में घोषणा की कि वह अब आज़म खान से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई नहीं करेंगे। उन्होंने इस फैसले के पीछे कोई कारण सार्वजनिक नहीं किया। अदालत में मौजूद सभी अधिवक्ताओं को यह निर्णय वहीं सुनाया गया।</p>
<p data-start="961" data-end="1198">सुनवाई के दौरान सह-आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एफ.ए. नक़वी और अधिवक्ता सैयद अहमद फैज़ान उपस्थित थे। वहीं आज़म खान और सह-आरोपी वीरेन्द्र गोयल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आई. जाफरी, अधिवक्ता शाश्वत आनंद और शशांक तिवारी मौजूद रहे।</p>
<p data-start="1200" data-end="1457">स्थिति को और महत्वपूर्ण बनाते हुए, जस्टिस समीर जैन ने न केवल यतीमखाना केस से खुद को अलग किया, बल्कि आज़म खान से जुड़े <em data-start="1318" data-end="1363">सभी लंबित मामलों को भी अपनी अदालत से रिलीज़</em> कर दिया। यह बेहद कम होता है कि कोई जज एक ही व्यक्ति के सभी मामलों से एक साथ स्वयं को अलग करे।</p>
<p data-start="1459" data-end="1636">अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट के अंतिम निर्णय पर लगी रोक (Stay) <em data-start="1536" data-end="1563">अगली सुनवाई तक जारी रहेगी</em>। इसका मतलब यह है कि फिलहाल ट्रायल कोर्ट कोई अंतिम फैसला नहीं सुना सकेगा।</p>
<p data-start="1638" data-end="1928">जस्टिस जैन के अलग होने के बाद अदालत ने निर्देश दिया है कि यह केस अब उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके लिए माननीय मुख्य न्यायाधीश से नामांकन (Nomination) प्राप्त किया जाएगा। यानी अब यह तय करना चीफ जस्टिस के अधिकार क्षेत्र में होगा कि इस मामले की सुनवाई किस बेंच द्वारा की जाएगी।</p>
<h3 data-start="1930" data-end="1957"><strong data-start="1934" data-end="1957">क्या है पूरा मामला?</strong></h3>
<p data-start="1959" data-end="2354">यह मामला ट्रायल कोर्ट के 30 मई 2025 के उस आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसमें अभियोजन गवाहों—विशेषकर वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ज़फर अहमद फ़ारूकी—को दोबारा बुलाने की मांग ठुकरा दी गई थी। साथ ही कथित बेदखली की वीडियोग्राफी को रिकॉर्ड में शामिल करने की याचिका भी खारिज कर दी गई थी। बचाव पक्ष का दावा है कि यह वीडियो उनकी घटनास्थल पर अनुपस्थिति साबित कर सकती है, जो निष्पक्ष सुनवाई के लिए आवश्यक है।</p>
<p data-start="2356" data-end="2581">पूरा मामला 12 एफआईआर पर आधारित है जिन्हें मिलाकर <em data-start="2405" data-end="2430">स्पेशल केस नंबर 45/2020</em> बनाया गया था। आरोपों में डकैती, आपराधिक षड्यंत्र और अनधिकृत प्रवेश जैसे गंभीर धाराएं शामिल हैं। यह मुकदमा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।</p><p>The post <a href="https://nishchaytimes.com/allahabad-high-court-justice-recuses-himself-from-hearing-all-azam-khan-cases/">इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस ने आज़म खान के सभी मामलों की सुनवाई से खुद को अलग किया</a> first appeared on <a href="https://nishchaytimes.com">Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</a>.</p>]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>यूपी टीजीटी परीक्षा फिर स्थगित, दिसंबर की तिथि रद्द</title>
		<link>https://nishchaytimes.com/up-tgt-exam-postponed-again-december-date-cancelled/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nishchay Times]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 09:06:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित होने वाली टीजीटी चयन लिखित परीक्षा एक बार फिर स्थगित कर दी गई है। यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 18 और 19 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। आयोग ने मंगलवार को हुई बैठक में परीक्षा टालने पर &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="480" data-end="934"><strong>प्रयागराज:</strong> उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित होने वाली <strong data-start="550" data-end="578">टीजीटी चयन लिखित परीक्षा</strong> एक बार फिर स्थगित कर दी गई है। यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 18 और 19 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। आयोग ने मंगलवार को हुई बैठक में परीक्षा टालने पर सहमति बनाई। उप सचिव ने प्रेस नोट जारी करते हुए बताया कि परीक्षा की <strong data-start="830" data-end="861">नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी</strong>, जिसे अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट <a href="http://upsessb.pariksha.nic.in"><em data-start="894" data-end="919">upsessb.pariksha.nic.in</em> </a>पर देख सकेंगे।</p>
<p data-start="936" data-end="1242">यह पहली बार नहीं है जब टीजीटी परीक्षा टली है। इससे पहले इसे <strong data-start="996" data-end="1018">15–16 अक्टूबर 2025</strong>, फिर <strong data-start="1024" data-end="1038">4–5 अप्रैल</strong>, <strong data-start="1040" data-end="1052">14–15 मई</strong>, और <strong data-start="1057" data-end="1072">21–22 जुलाई</strong> की तिथि पर प्रस्तावित किया गया था। लेकिन हर बार परीक्षा किसी न किसी कारण से स्थगित होती रही। लगातार तीन साल से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में अब नाराज़गी बढ़ती जा रही है।</p>
<p data-start="1244" data-end="1491">जनवरी 2022 में यूपी में <strong data-start="1268" data-end="1288">3539 टीजीटी पदों</strong> के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, जिसके लिए <strong data-start="1333" data-end="1364">8.5 लाख से अधिक अभ्यर्थियों</strong> ने आवेदन किया था। इतने बड़े स्तर पर भर्ती प्रक्रिया अटकी रहने से छात्रों को चयन प्रक्रिया के भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।</p>
<p data-start="1493" data-end="1702">यूपी टीजीटी-पीजीटी परीक्षा 2025 ऑफलाइन मोड में ओएमआर शीट पर आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश पत्र और पहचान पत्र लाना अनिवार्य है। बोर्ड द्वारा एडमिट कार्ड की हार्ड कॉपी नहीं भेजी जाएगी।</p>
<p data-start="1704" data-end="1739"><strong data-start="1704" data-end="1737">एडमिट कार्ड ऐसे डाउनलोड करें:</strong></p>
<ol data-start="1740" data-end="1932">
<li data-start="1740" data-end="1797">
<p data-start="1743" data-end="1797">आधिकारिक वेबसाइट पर जाएں – <em data-start="1770" data-end="1795">upsessb.pariksha.nic.in</em></p>
</li>
<li data-start="1798" data-end="1841">
<p data-start="1801" data-end="1841">“UP TGT Admit Card” लिंक पर क्लिक करें</p>
</li>
<li data-start="1842" data-end="1890">
<p data-start="1845" data-end="1890">लॉगिन पेज पर पंजीकरण नंबर और जन्म तिथि भरें</p>
</li>
<li data-start="1891" data-end="1932">
<p data-start="1894" data-end="1932">एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सुरक्षित रखें</p>
</li>
</ol><p>The post <a href="https://nishchaytimes.com/up-tgt-exam-postponed-again-december-date-cancelled/">यूपी टीजीटी परीक्षा फिर स्थगित, दिसंबर की तिथि रद्द</a> first appeared on <a href="https://nishchaytimes.com">Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</a>.</p>]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8220;वह तो संविधान को पॉकेट में रखते हैं&#8221;</title>
		<link>https://nishchaytimes.com/he-keeps-the-constitution-in-his-pocket/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nishchay Times]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:54:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अरविंद कांत त्रिपाठी (मान्यताप्राप्त स्वतंत्र पत्रकार) जब वर्ष 2024 में उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव का परिणाम आया तो साफ हुआ कि &#8211; विधानसभा के कुल 403 विधायकों में से 205 पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यह विधानसभा में अपराधियों का स्पष्ट बहुमत है। प्रजातंत्र के पवित्र मंदिर (विधान भवन) में आपराधिक रिकॉर्ड वाले विधायकों, का बहुमत &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://nishchaytimes.com/he-keeps-the-constitution-in-his-pocket/">“वह तो संविधान को पॉकेट में रखते हैं”</a> first appeared on <a href="https://nishchaytimes.com">Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</a>.</p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अरविंद कांत त्रिपाठी</strong></p>
<p><strong>(मान्यताप्राप्त स्वतंत्र पत्रकार)</strong></p>
<p>जब वर्ष 2024 में उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव का परिणाम आया तो साफ हुआ कि &#8211; विधानसभा के कुल 403 विधायकों में से 205 पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यह विधानसभा में अपराधियों का स्पष्ट बहुमत है।<br />
प्रजातंत्र के पवित्र मंदिर (विधान भवन) में आपराधिक रिकॉर्ड वाले विधायकों, का बहुमत प्रजातंत्र के लिए खतरनाक नहीं है। तभी तो कभी किसी नेता ने पॉकेट से संविधान निकालकर नहीं कहा कि प्रजातंत्र खतरे में है। संविधान खतरे में है। बल्कि स्थिति उलट है। देश के नसीब से, जब किसी दल के दिमाग में अपराधी सांसद, विधायक यहां तक कि सीएम और पीएम तक को किनारे करते हुए उसे, उसके उचित ठिकाने (जेल) तक पहुंचाने का कानून बनाने का विचार आया है तो निर्मित होने वाले कानून को ही प्रजातंत्र के लिए खतरा बताया जा रहा है।<br />
थोड़ा और जान लेते हैं। विधानसभा के कुल 403 माननीय विधायकों में से जिन 205 पर अपराधिक मुकदमें दर्ज हैं उनमें से 158 पर संगीन धाराओं (हत्या, बलात्कार, अपहरण) जैसे मुकदमें हैं।<br />
पिछली विधानसभा (2017) में आपराधिक रिकॉर्ड वाले 147 विधायक थे। पांच साल बाद 36 फीसदी वृद्धि के साथ इनकी संख्या 205 हो गई। इसी तरह 2017 में संगीन अपराध वाले मुकदमें 107 माननीयों पर दर्ज थे तो 2024 में इनकी संख्या 158 गई है। आगे क्या होगा? परमात्मा जानें।<br />
हमाम (स्नान कुंड) में सब निर्वस्त्र हैं। भाजपा के 255 में से 111 विधायक, समाजवादी पार्टी के 111 विधायकों में से 71, राष्ट्रीय लोकदल, के आठ में से सात, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के छह-छह में से चार-चार और अपना दल सोनेलाल के 12 में से तीन विधायक आपराधिक रिकॉर्ड वाले हैं।<br />
इसके अलावा कांग्रेस, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के कुल दो-दो विधायक हैं। दोनों अपराधिक रिकॉर्डधारी हैं। सदन में बसपा का एकमात्र विधायक है। वह भी अपराधिक रिकॉर्ड वाला है।<br />
संसदीय उपस्थित में जब हमारे सामने &#8211; पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, लालबहादुर शास्त्री, अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत, रामधारी सिंह दिनकर, डॉक्टर लोहिया, गुलज़ारी लाल नंदा, कर्पूरी ठाकुर, अटल बिहारी वाजपेई, वीजू पटनायक, मोरार जी, चौधरी चरण सिंह, जान मथाई और के. कामराज आदि राजनीतिक संतों और मनीषियों का आदर्श था तब हम इतने पतित होकर पतन के इस मुहाने पर हैं, तो आज की संसदीय उपस्थिति जिस भावी भारत का आदर्श है, वह भारत कैसा होगा? कहां जाएगा? यह अनुमान भयावह है। गांव-गिरांव में थाली-लोटा चुराते पकड़े गए &#8220;धनई&#8221; पर पूरा गांव पूरी ताकत और ईमानदारी से हाथ साफ करते हुए उन्हें जमीन पर लम्बा कर देता है। कई दिनों तक धनई को पकड़ने और पीटने वाले &#8220;पुरुषार्थ&#8221; का बखान होता है। उधर अलत्कार-बलात्कार करते पकड़े जाने पर समाज बलात्कारी को &#8220;डायरेक्ट&#8221; यमराज के हवाले भी करते देखा जाता है। यह तो रही किसी आम चोर व बलात्कारी की बात। ठहरिए! अभी दूसरी सीन भी है।&#8230;.. ऐसे ही कई अबलाओं को नोचने वाला बलात्कारी, बच्चों को अनाथ और महिलाओं को बेवा बनाने वाला हत्यारा और अनगिनत लोगों का हक डकार जाने वाला भ्रष्टाचारी &#8220;अगर&#8221;&#8230;अगर समर्थवान है, जातीय मुखिया है, गुंडा है, माफिया है, बाहुबली है तो&#8230;.तो समाज का पुरुषार्थ (धनई चोर को मिट्टी में लिटा देने वाला) आश्चर्यजनक ढंग से पूरी बेशर्मी के साथ खुद मटियामेट हो जाता है। जाति और धर्म की घिनौनी &#8220;सोच&#8221; समाज की तार्किक बुद्धि को उसके घुटनों में कर देती है। परिणामतः उस अपराधी को जेल पहुंचाने की उठाने वाली आवाज की जगह, उसका मोहक गुणगान होता है।<br />
हैरत तो यह है कि किसी साइकिल चोर, उचक्के और लफंगे में समाज ; जाति या धर्म न देखकर उसे महज अपराधी के रूप में ही देखता है। लेकिन बड़े-बड़े अपराधों के जरिए नेता बन गए व्यक्ति से समाज अपनी अवचेतना में अपना जातीय रिश्ता जोड़ता है। यही सबसे खतरनाक जोड़ और सारे अनाथों की जड़ है।<br />
पूरे समाज के लिए भले हानिकारक हो लेकिन अपने जाति के अपराधी &#8220;उर्फ&#8221; नेताजी को वह अपना भाग्यविधाता मानता है। राष्ट्र की भाग्यरेखा तय करने वाले सबसे महत्वपूर्ण समय (चुनाव) में राष्ट्रहित से ऊपर जातीयता को रखता है। नेता जी को अपने कंधों पर बैठाते हुए संसद या विधानसभाओं में पहुंचा कर &#8220;माननीय&#8221; बना देता है। केवल और केवल यही दृश्य प्रजातंत्र के लिए खतरनाक है। नेताओं द्वारा प्रजातंत्र को खरते में बताने वाली बाकी हर बात चोचला है, बकवास है। लोटा-थाली, साइकिल चुराने वाला अपराधी है। लेकिन हत्या, राहजनी, डकैती, बलात्कार और आकूत भ्रष्टाचार करने वाला अपराधी नहीं माननीय है, कैसे? वह ऐसे, कि वह किसी जाति का, किसी वर्ग का, किसी धर्म का, किसी सोच या संप्रदाय का बड़ा मुखिया है। उसके पीछे जातीय या धार्मिक भावनाओं के उन्माद में गोता लगाने वाला भारी संख्या बल है और संख्या बल ही प्रजातंत्र में ताकत है। इसी संख्या बल का दुरुपयोग या सदुपयोग करके अरविंद केजरीवाल ने भारतीय संविधान के इतिहास में पहली बार जेल से सरकार चलाने का रिकार्ड स्थापित किया है। फिर संख्या बल ही आदमी के वजन का निर्धारक है। उदाहरण सामने हैं &#8211; सजायाफ्ता आशाराम बापू और राम रहीम अपने लाखों-करोड़ों भक्तों के संख्याबल पर आज भी वोटबैंक की सियासत में कई टन के वजनी हैं।</p>
<p>बहरहाल किसी मामूली चोर और किसी सामर्थ्यवान माफिया (नामी नेता) के साथ जनता द्वारा किए जाने वाले दो अलग &#8211; अलग (दोहरे) आचरण का ज्ञान राजसी भोग करने वाले माननीयों को अच्छी होता है। इसलिए वह, समाज के प्रतिष्ठित लोगों, अच्छे वक्ताओं, कथित समाजसेवकों, चंद प्रभावशाली धर्म गुरुओं और मुल्ला-मौलानाओं की यथायोग्य सेवा (चरण वंदना, धन या धमकी) के आधार पर उन्हें अपना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दरबारी बनाते हैं। अपना स्वाभिमान मार चुके यह दरबारी कवि &#8211; अपने-अपने प्रभाव क्षेत्रों में उचित समय पर, अपने अन्नदाता (माननीय) का बखान पूरी वैज्ञानिकता के साथ धरतीपुत्र और गरीबों का मसीहा आदि रूपों में करते हैं। चूंकि ये समाज के प्रभावी लोग होते हैं अतः जनता पर इनकी बातों का असर होता है। फिर बौद्धिक रूप से गुलाम यह जनता एक पैकेट में 5-6 पूड़ी, पुड़ियों के बीच दबी थोड़ी सब्जी, मोतीचूर के एक अदद लड्डू पर, स्थानीय दरबारी कवियों की अगुवाई में रिजर्व बस सेवा द्वारा &#8220;धरती-पुत्र&#8221; की रैलियों में रेला लगाने झुंड के झुंड पहुंचती है।&#8230;.अगले पांच साल पूड़ी-हलवा से इनका कितना ख्याल होगा ? इसे धरतीपुत्र भी जानता है और जनता भी।<br />
भ्रष्ट और अपराधी नेताओं की &#8220;ताकत&#8221; उनकी दलाली में लगा भारीभरकम वर्ग है। विशिष्ट कौशल वाला यह वर्ग सत्ता और विपक्ष दोनों में होता है। अपनी आत्मा मार चुका यह वर्ग जुल्म के खिलाफ आवाज नहीं दे सकता क्योंकि उसके मुंह में निवाला होता है। एक बात और लोगों को मूर्ख बनाना आसान है लेकिन उन्हें यह समझना कठिन है कि उन्हें मूर्ख बनाया गया है। बाबा साहेब ने सोचा था भावी भारत के नेता नैतिक होंगे। वह इतने नैतिक हैं कि जेल से सरकार चलाते हैं। जमानत पर छुटने के बाद लाज-हया को ताख पर रखकर फूल मालाओं से लदा जुलूस निकालते हैं। जनहित के मुद्दों पर संसद को जामकर देश का करोड़ों रुपया फूंक देते हैं। लेकिन अपने वेतन और सुख सुविधा में बढ़ोत्तरी के प्रताव को बिना देर किए सर्वसम्मति से पास कर देते हैं। इसे कहते हैं बाबा साहेब के संविधान को जेब में रखना।</p><p>The post <a href="https://nishchaytimes.com/he-keeps-the-constitution-in-his-pocket/">“वह तो संविधान को पॉकेट में रखते हैं”</a> first appeared on <a href="https://nishchaytimes.com">Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</a>.</p>]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>&#8220;प्रयागराज-वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा</title>
		<link>https://nishchaytimes.com/ganga-water-level-increased-in-prayagraj-varanasi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nishchay Times]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Jul 2025 08:18:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>निश्चय टाइम्स, लखनऊ। उत्तर भारत में लगातार हो रही बारिश के चलते उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना सहित कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, बहराइच और कन्नौज सहित विभिन्न जिलों में प्रशासन ने अलर्ट जारी कर बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="138" data-end="455"><strong data-start="138" data-end="162">निश्चय टाइम्स, लखनऊ। </strong>उत्तर भारत में लगातार हो रही बारिश के चलते उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना सहित कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, बहराइच और कन्नौज सहित विभिन्न जिलों में प्रशासन ने अलर्ट जारी कर बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए हैं।</p>
<p data-start="457" data-end="856">प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नतीजतन नागवासुकी, छोटा बघाड़ा, सलोरी, दारागंज और कछारी जैसे निचले इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया है। हालांकि अभी दोनों नदियां खतरे के निशान (84.73 मीटर) से नीचे बह रही हैं, लेकिन बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण बना हुआ है। प्रशासन ने एहतियातन निचले इलाकों को खाली कराना शुरू कर दिया है और लोगों को राहत शिविरों में भेजा जा रहा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है, जहां जल निगम, जलकल, स्वास्थ्य विभाग और एनडीआरएफ की टीमें समन्वय में काम कर रही हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।</p>
<p data-start="1087" data-end="1329">वाराणसी से मिली जानकारी के अनुसार, गंगा का जलस्तर 68.70 मीटर तक पहुंच चुका है, जो चेतावनी बिंदु (70.26 मीटर) से केवल 1.56 मीटर नीचे है। इससे घाटों के पास रहकर आजीविका चलाने वाले नाविकों और छोटे दुकानदारों की आजीविका पर संकट गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की निगरानी में सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए पूरी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।</p><p>The post <a href="https://nishchaytimes.com/ganga-water-level-increased-in-prayagraj-varanasi/">“प्रयागराज-वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा</a> first appeared on <a href="https://nishchaytimes.com">Nishchay Times | निश्चय टाइम्स</a>.</p>]]></content:encoded>
					
		
		
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