
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ओटीटी (ऑन डिमांड वीडियो) प्लेटफार्मों को नशीले पदार्थों के प्रचार और उसके सामान्यीकरण के खिलाफ चेतावनी दी है। सरकार का यह कदम ओटीटी मंचों पर नशे की लत और नशीले पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देने वाले कंटेंट की बढ़ती संख्या को लेकर उठाया गया है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इन प्लेटफार्मों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपनी सामग्री में नशीली चीजों का प्रचार करने से बचें, खासकर ऐसे शो और फिल्में जो युवा दर्शकों के बीच नशे की आदतों को प्रोत्साहित करते हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी मंचों के लिए जारी किए गए परामर्श में कहा, ‘‘इस तरह के चित्रण के, खासकर युवा और संवेदनशील दर्शकों पर संभावित प्रभाव के मद्देनजर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।’’
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ओटीटी प्लेटफार्मों पर नशे से संबंधित विषयों पर आधारित फिल्मों और वेब सीरीज़ की संख्या में वृद्धि देखी गई है। मंत्रालय ने विशेष रूप से उन शो और फिल्मों की आलोचना की है, जो न केवल नशीले पदार्थों का सेवन दिखाते हैं, बल्कि उसे एक आकर्षक और लुभावने तरीके से प्रस्तुत करते हैं। इससे यह संदेश जा सकता है कि नशा करना एक सामान्य और फैशनेबल गतिविधि है, जो समाज में इसके प्रति सहानुभूति और स्वीकार्यता को बढ़ा सकता है।
परामर्श में ओटीटी मंचों के लिए आचार संहिता का हवाला देते हुए उन्हें सामग्री की समीक्षा के दौरान उचित सावधानी बरतने और किसी भी कार्यक्रम में नशीले पदार्थों के उपयोग का चित्रण करते समय अस्वीकरण या उपयोगकर्ता चेतावनी जारी करने के लिए कहा गया है।
केंद्र सरकार ने इस प्रकार के कंटेंट को समाज के लिए हानिकारक मानते हुए ओटीटी प्लेटफार्मों को अपने कंटेंट के मामलों में अधिक जिम्मेदारी से काम करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा कि ओटीटी प्लेटफार्मों को अपने सामग्री दिशानिर्देशों में सुधार करना चाहिए ताकि नशीले पदार्थों का गलत प्रचार रोका जा सके। इसके अलावा, यह भी सुझाव दिया गया है कि संबंधित प्लेटफार्मों को सरकार द्वारा निर्धारित सामग्री की श्रेणी और दिशानिर्देशों के अनुरूप अपने कंटेंट को सावधानीपूर्वक क्यूरेट करना चाहिए।
सरकार ने ओटीटी प्लेटफार्मों से अपेक्षाएँ जताई हैं कि वे न सिर्फ नशीले पदार्थों के सेवन से संबंधित विषयों को बढ़ावा देने से बचें, बल्कि वे उन सामाजिक मुद्दों पर भी जिम्मेदार तरीके से काम करें जो दर्शकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकते हैं। अगर इन प्लेटफार्मों पर ऐसे कंटेंट का प्रसारण जारी रहा, तो भविष्य में नियामक कदम उठाने की संभावना भी जताई गई है।
यह कदम सरकार की ओर से डिजिटल और ओटीटी प्लेटफार्मों पर सामग्री के नियंत्रण और निगरानी बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है।
इसमें कहा गया है, ‘‘ओटीटी मंचों से अनुरोध है कि वे व्यापक जनहित में स्वेच्छा से इन दिशा-निर्देशों का पालन करें। इनका पालन नहीं करने पर विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस), 1985 के प्रावधानों के तहत नियामक संबंधी जांच हो सकती है।’’
ओटीटी मंचों की आचार संहिता में यह प्रावधान है कि किसी कानून के तहत या किसी सक्षम न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित किसी भी सामग्री को प्रसारित, प्रकाशित या प्रदर्शित नहीं किया जाएगा।
इस परामर्श को ओटीटी मंचों के स्व-नियामक निकायों के साथ भी साझा किया गया है।


