जाति जनगणना पर चंद्रशेखर आज़ाद का केंद्र पर हमला: “बिहार चुनाव के बाद सरकार बदल सकती है रुख”

जनगणना को लेकर सरकार गंभीर नहीं”: एएसपी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने जताई साजिश की आशंका
सहारनपुर – आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि जाति जनगणना को लेकर सरकार का रुख चुनावों के बाद बदल सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए ही फिलहाल इस मुद्दे पर सरकार नरम दिख रही है, लेकिन बाद में इसे टाल सकती है।
चंद्रशेखर आज़ाद ने एक मीडिया बातचीत में कहा, “हमारी पार्टी में कई लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार बिहार चुनावों के दबाव में आकर जाति जनगणना की बात कर रही है। नीतीश कुमार पहले ही बिहार में यह कर चुके हैं। लेकिन हमें डर है कि चुनाव के बाद सरकार कह सकती है कि वो इसे नहीं कराएगी।”
उन्होंने जाति आधारित जनगणना को समय की जरूरत बताया और कहा कि इससे पिछड़े वर्गों के साथ-साथ सामान्य वर्ग को भी समाज में संसाधनों के वितरण की सही तस्वीर मिलेगी। “अगर जाति के आधार पर आंकड़े सामने आएंगे तो यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन लोग किन सुविधाओं से वंचित हैं — शिक्षा, भूमि, नौकरी आदि के क्षेत्र में।”
चंद्रशेखर ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह केवल बातों में जाति गणना का समर्थन कर रही है लेकिन इसे लागू करने की कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में घोषणा की थी कि कुछ राज्यों ने जातिगत सर्वेक्षण तो किए हैं, लेकिन उनकी पारदर्शिता और मंशा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा, “कुछ राज्यों की जाति जनगणना पूरी तरह राजनीतिक उद्देश्य से कराई गई, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति बनी है। इसीलिए निर्णय लिया गया कि जाति गणना को अलग से करने के बजाय मुख्य जनगणना का ही हिस्सा बनाया जाएगा।”
बता दें कि बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना पहले ही जातिगत जनगणना करा चुके हैं। तेलंगाना में तो 42% पिछड़ा वर्ग आरक्षण भी लागू है।


