नागरिक चार्टर पर सवाल: आंकड़ों में सुधार, जमीनी हकीकत में देरी का खेल?
99.9% समय पर निस्तारण का दावा, फिर भी हजारों आवेदन लंबित—सिस्टम पर उठे सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
Reserve Bank of India द्वारा जारी नागरिक चार्टर के आंकड़े एक ओर जहां तेज़ निस्तारण का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की वास्तविक स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़े करते नजर आते हैं। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार कुल 24,911 आवेदनों में से 21,428 को समय सीमा के भीतर निपटाने का दावा किया गया है, जो 99.9% सफलता दर दर्शाता है।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि माह के अंत तक 3,452 आवेदन लंबित बने हुए हैं, जिनमें से 17 आवेदन समय-सीमा से बाहर भी हैं। सवाल यह उठता है कि जब लगभग सभी आवेदनों का समय पर निस्तारण हो रहा है, तो लंबित मामलों की संख्या लगातार क्यों बनी हुई है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आंकड़ों को “समय-सीमा के भीतर” दिखाने के लिए कई मामलों को तकनीकी रूप से समायोजित किया जाता है, जबकि वास्तविक समाधान में देरी होती है। खासकर विदेशी मुद्रा प्रबंधन, विनियमन और मुद्रा प्रबंधन जैसे विभागों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रहना इस ओर इशारा करता है कि जमीनी स्तर पर प्रक्रियाएं अभी भी धीमी हैं।
इसके अलावा 527 आवेदनों को अतिरिक्त जानकारी के नाम पर वापस भेजा जाना भी सवालों के घेरे में है। क्या यह देरी को छुपाने का तरीका है? आम नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया अक्सर जटिल और समय लेने वाली बन जाती है।
बाहरी एजेंसियों से इनपुट के इंतजार में 14 मामलों का अटका रहना भी सिस्टम की निर्भरता और समन्वय की कमी को दर्शाता है।
हालांकि आंकड़ों में पारदर्शिता दिखाई जाती है, लेकिन नागरिकों के अनुभव कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। जरूरत इस बात की है कि केवल प्रतिशत के खेल से आगे बढ़कर वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए।



