हरियाणा चुनाव परिणाम 2024: ‘कांग्रेस की हालत जलेबी की तरह’ – संजय राउत के बयान पर बीजेपी का पलटवार

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत और कांग्रेस की हार के बाद सियासी बयानबाज़ी जोरों पर है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत के कांग्रेस पर दिए गए “जलेबी” बयान पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी कांग्रेस पर तंज कसा है।
बीजेपी का तंज: “EVM वहां ठीक, जहां कांग्रेस जीती”
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस द्वारा चुनावों में ईवीएम पर उठाए सवालों का मजाक उड़ाते हुए कहा, “जिन राज्यों में कांग्रेस जीत गई वहां ईवीएम ठीक थी, लेकिन जहां हार गए वहां ईवीएम खराब हो गई। ये दलील नहीं चलेगी।” उन्होंने संजय राउत के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस अब तक अपने सहयोगियों को अहमियत नहीं देती थी, लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उनके सहयोगी ही उन्हें ‘जलेबी’ बना रहे हैं।
झारखंड और महाराष्ट्र पर असर की संभावना
शाहनवाज हुसैन ने कहा कि हरियाणा चुनाव के नतीजों का असर झारखंड और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हरियाणा में “मैनेजमेंट” के दम पर हार को जीत में बदला है और विपक्ष को हार का सामना करना पड़ा।
संजय राउत का बयान: “कांग्रेस का गर्व उन्हें ले डूबा”
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस का “गर्व” हरियाणा में उनकी हार की वजह बना। उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ना चाहती है, तो उसे अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। बीजेपी ने 370 का मुद्दा उठाया और जहां से धारा 370 हटाई वहां बीजेपी हार गई, लेकिन हरियाणा में कांग्रेस इंडिया गठबंधन के सहयोग के बिना जीतने की सोच रही थी।”
AAP का तंज: “कांग्रेस को आत्मचिंतन की जरूरत”
आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर तंज कसा। उन्होंने कांग्रेस पर इशारों में हमला करते हुए लिखा:
“हमारी आरज़ू की फिक्र करते तो कुछ और बात होती,
हमारी हसरत का ख्याल रखते तो एक अलग शाम होती।
आज वो भी पछता रहा होगा मेरा साथ छोड़कर,
अगर साथ-साथ चलते तो कुछ और बात होती।”
नतीजे और गठबंधन की भविष्य की राह
हरियाणा चुनाव के बाद कांग्रेस की हार और इंडिया गठबंधन के भीतर दरारें खुलकर सामने आई हैं। अब कांग्रेस के नेतृत्व को आत्मचिंतन करने और सहयोगी दलों के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। दूसरी ओर, बीजेपी इन चुनाव परिणामों को अपनी आगामी राजनीतिक रणनीति के लिए प्रेरणा मान रही है, जो झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी असर डाल सकती है।



