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प्रधानमंत्री मोदी और चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ की गणेश पूजा पर विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर हाल ही में एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के साथ गणेश पूजा की एक तस्वीर साझा की। पीएम मोदी ने लिखा, “मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ के घर गणेश पूजा में शामिल हुआ. भगवान गणेश हम सबको सुख, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करें।”
इस व्यक्तिगत समारोह में प्रधानमंत्री का शामिल होना कुछ विवादों को जन्म दे रहा है। भारत के संविधान में कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच स्वतंत्रता और विभाजन की अवधारणा पर कई लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने इसे लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस का पीएम को निमंत्रण देना और पीएम का उसे स्वीकार करना दोनों ही गलत हैं।

इसके विपरीत, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील पिंकी आनंद ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि जो पहले नहीं हुआ, वह कभी नहीं हो सकता। पीएम का सीजेआई के आवास पर जाना एक अच्छी मिसाल है।”
भारत की जानी-मानी वकील इंदिरा जयसिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत से समझौता किया है। चीफ जस्टिस की स्वतंत्रता पर से अब विश्वास उठ गया है।” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) से इस पर आलोचना करने की मांग की है।
मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ इस साल 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं और इस बीच उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की है। पीएम मोदी के चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ के घर जाने पर कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटिबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) ने भी बयान जारी किया है। वकीलों के इस समूह ने कहा है, “न्यायपालिका पर संविधान की रक्षा करने और बिना किसी भय या पक्षपात के न्याय सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी है। इसे कार्यपालिका से पूरी तरह से स्वतंत्र माना जाना चाहिए।”

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