झारखंड के प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम मंदिर के कपाट महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर तड़के 3 बजे खोल दिए गए। इसके बाद भगवान भोलेनाथ को कांचा जल अर्पित किया गया और 4 बजे से आम श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई। सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
श्रद्धालुओं की अपार भीड़, मनोकामनाओं की पूर्ति का विश्वास
बैद्यनाथ धाम के पुजारी जयशंकर पंडा के अनुसार, यह दिन झारखंड के लिए बेहद खास है। राज्य के हर जिले से श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और स्पर्श मात्र से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
मंदिर परिसर में उमड़ा आस्था का सैलाब
श्रद्धालुओं का उत्साह ऐसा था कि रात 12 बजे से ही लंबी कतारें लग गई थीं। आम भक्तों के लिए सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोल दिए गए, और तब से भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे श्रद्धालु काफी संतुष्ट नजर आए।
चारों प्रहर की पूजा और विशेष अनुष्ठान
शाम 6 बजे से चारों प्रहर की पूजा विधिवत रूप से प्रारंभ होगी। भोलेनाथ की षोडशोपचार विधि से पूजा की जाएगी, जिसमें भगवान को मोर मुकुट भी अर्पित किया जाएगा। रात्रि की विशेष पूजा में भोलेनाथ को दूध, दही, घी, फल-मूल, जनेऊ, इत्र, अरवा चावल, अबीर, सिंदूर, मिठाई, मेवा, चंदन, गंगाजल, बेलपत्र और भांग अर्पित किए जाएंगे। साथ ही माता पार्वती का भी विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
श्रद्धालुओं में भक्ति का उत्साह, प्रशासन ने किए कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंदिर प्रशासन, पुलिस बल और स्वयंसेवकों की मदद से भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराए जा रहे हैं। बाबा बैद्यनाथ के दरबार में भक्तों का यह उत्साह झारखंड की धार्मिक आस्था को और भी मजबूत कर रहा है।