आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: भारत की वैश्विक आर्थिक ताकत और मजबूत
🌍 प्रेषण, विदेशी निवेश और फॉरेक्स रिज़र्व में भारत ने रचा नया रिकॉर्ड

निश्चय टाइम्स डेस्क। भारत वैश्विक आर्थिक मंच पर तेज़ी से एक सशक्त और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2025-26 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का बाह्य क्षेत्र मज़बूत, संतुलित और स्थिर बना हुआ है।
💰 भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता
वित्त वर्ष 2025 में भारत को रिकॉर्ड 135.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रेषण प्राप्त हुआ, जिससे भारत लगातार विश्व में प्रेषण प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है। यह उपलब्धि विदेशों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों के बढ़ते योगदान को दर्शाती है।
🏦 विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक ऊँचाई पर
16 जनवरी 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। यह भंडार
- लगभग 11 माह के आयात
- और विदेशी ऋण के 94% से अधिक
को कवर करने में सक्षम है, जो भारत को वैश्विक अस्थिरता के बीच एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
🌐 एफडीआई और ग्रीनफील्ड निवेश में भारत आगे
अंकटाड (UNCTAD) के अनुसार भारत
- दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा FDI प्राप्तकर्ता बना हुआ है
- इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रमुख एशियाई देशों से भी आगे निकल गया है
वर्ष 2020-24 के बीच
👉 114 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ
👉 भारत ग्रीनफील्ड डिजिटल निवेश का सबसे बड़ा वैश्विक गंतव्य रहा।
📉 चालू खाता घाटा नियंत्रण में
सेवा निर्यात और प्रेषण से मजबूत निवल अंतर्वाह के कारण
- चालू खाता घाटा GDP के 1.3% से घटकर 0.8% तक आने की उम्मीद है।
यह भारत की बाह्य आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है।
📊 विदेशी ऋण और रुपये की स्थिति
- सितंबर 2025 तक भारत का विदेशी ऋण GDP का केवल 19.2%
- वैश्विक विदेशी ऋण में भारत की हिस्सेदारी महज़ 0.69%
- कुल ऋण में विदेशी ऋण की हिस्सेदारी 5% से भी कम
यह भारत की संतुलित ऋण नीति और जोखिम-नियंत्रण क्षमता को दर्शाता है।
🏗️ आगे की राह
आर्थिक सर्वेक्षण इस बात पर ज़ोर देता है कि
- विनिर्माण लागत में कमी
- उच्च मूल्य सेवा निर्यात
- उत्पादकता आधारित औद्योगिक नीति
के माध्यम से भारत निर्यात प्रतिस्पर्धा और वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत कर सकता है।



