इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बूम, लेकिन वैल्यू एडिशन अब भी सीमित—18-20% पर अटका आत्मनिर्भरता का दावा

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन आत्मनिर्भरता के दावों के बीच कुछ अहम सवाल भी खड़े हो रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, घरेलू मूल्य संवर्धन अब 18–20% तक पहुंच गया है, जो प्रगति तो दर्शाता है, लेकिन अभी भी पूर्ण स्वदेशीकरण से काफी दूर है।
पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि निर्यात में 8 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। खास बात यह है कि 2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी निर्यातित वस्तु बनकर उभरे हैं।
PLI Scheme के तहत बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (LSEM) में निवेश, उत्पादन और निर्यात ने लक्ष्य से कहीं अधिक प्रदर्शन किया है। इस योजना के जरिए 1.85 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि 18-20% वैल्यू एडिशन यह संकेत देता है कि अभी भी कंपोनेंट्स और कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है। यानी असेंबली में तेजी आई है, लेकिन कोर मैन्युफैक्चरिंग अभी सीमित है।
जितिन प्रसाद ने संसद में जानकारी दी कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है और मोबाइल उत्पादन 5.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
आईटी हार्डवेयर PLI 2.0 और ECMS Scheme जैसी योजनाओं के जरिए कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। ECMS के तहत 1.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जो लक्ष्य से लगभग दोगुना है।
फिर भी, जानकारों का मानना है कि जब तक चिप्स, सेमीकंडक्टर और उच्च तकनीकी कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन मजबूत नहीं होगा, तब तक भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स आत्मनिर्भरता अधूरी ही रहेगी।



