कपड़ा एवं परिधान उद्योग में निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में 1.8 फीसदी की गिरावट
निश्चय टाइम्स डेस्क। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय भारत से विश्व को होने वाले कपड़ा एवं परिधान (हस्तशिल्प सहित) के निर्यात की नियमित निगरानी कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत के कपड़ा एवं परिधान (हस्तशिल्प सहित) का कुल निर्यात 37,755.0 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा जो पिछले वर्ष (वित्तीय वर्ष 2023-24) की तुलना में 5.2 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता हैं। इसके अलावा, अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान भारत के कपड़ा एवं परिधान (हस्तशिल्प सहित) का कुल निर्यात 20,401.95 मिलियन अमेरिकी डॉलर पंहुचा जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के (20,728.05 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की तुलना में 1.8 फीसदी की मामूली गिरावट को दर्शा रहे हैं। फिर भी वैश्विक टैरिफ-संबंधी और अन्य बाहरी चुनौतियों के बावजूद हमारा निर्यात प्रदर्शन एक तरह से में समग्र स्थिरता का संकेत दे रहा है। (स्रोत- वाणिज्य मंत्रालय, त्वरित अनुमान)। यह जानकारी राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कपड़ा राज्य मंत्री पबीत्र मारघेरिटा द्वारा दी गई। गौरतलब बात ये है की अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान, भारत के निर्यात ने पिछले वर्ष की तुलना में 100 से अधिक देशों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की- जिसमें यूएई, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, इटली, चीन, सऊदी अरब, मिस्र और जापान जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं। यह स्थिति भारतीय कपड़ा उद्योग के लचीलेपन और विविधीकरण प्रयासों को दर्शाता है। (स्रोत- डीजीसीआईएस) उत्पाद विविधीकरण, मांग, गुणवत्ता, संविदात्मक व्यवस्थाएँ इत्यादि विभिन्न कारकों का संयोजन इस बात को निर्धारित करेगा कि जबाबी टैरिफ तरीकों का भारत के वस्त्र क्षेत्र के निर्यात पर वैश्विक बाजार में क्या प्रभाव पड़ेगा? सरकार, भारत के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ उपायों के प्रभाव को कम करने के लिए एक व्यापक बहुआयामी रणनीति पर अपना काम निरंतर जारी रखे हुए है। इसमें परस्पर लाभकारी भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए अमेरिकी सरकार के साथ गहन वार्ता के अलावा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रदत्त व्यापार राहत उपायों के माध्यम से तात्कालिक राहत भी दिया जा रहा है। इसके अलावा देश के निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना, अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों के माध्यम से उत्पादों की घरेलू मांग में वृद्धि, नए निर्यात प्रोत्साहन मिशन जैसे कई उपाय, जो हमारे निर्यातकों को सहायता एवं समर्थन प्रदान करते हैं, किये जा रहे हैं। इस क्रम में भारत दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) कर निर्यात प्रोत्साहन को अमली जामा पहना रहा है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय निर्यातकों, निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (ईपीसी) और एमएसएमई सहित विभिन्न हितधारकों के साथ नियमित परामर्श में है, ताकि अमेरिका के टैरिफ का भारत के वस्त्र एवं परिधान निर्यात तथा अन्य चुनौतियों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जा सके। सरकार आधुनिक, एकीकृत, विश्वस्तरीय कपड़ा अवसंरचना बनाने के लिए पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्कों (पीएम मित्रा) की कई प्रमुख योजनाएँ कार्यान्वित कर रही है। सरकार तमिलनाडु (विरुधुनगर), तेलंगाना (वारंगल), गुजरात (नवसारी), कर्नाटक (कालाबुर्गी), मध्य प्रदेश (धार), उत्तर प्रदेश (लखनऊ एवं हरदोई), तथा महाराष्ट्र (अमरावती) में संबंधित राज्य सरकारों के सहयोग से 7 पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम-मित्रा) पार्क स्थापित कर रही है। ये पार्क लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने, उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने तथा 2030 तक के कपड़ा निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देने के उद्देश्य से निर्मित किये गए हैं। सरकार बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा देने तथा उद्योग में प्रतिस्पर्धा की भावना को मजबूत करने के लिए एमएमएफ फैब्रिक, एमएमएफ अपैरल तथा तकनीकी वस्त्रों पर केंद्रित उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भी कार्यान्वित कर रही है, जिसकी स्वीकृत राशि 10,683 करोड़ रुपये है। अक्टूबर 2025 में लाये गए संशोधनों के माध्यम से कपड़ा क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना को निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाया गया है। इस योजना में न्यूनतम निवेश सीमा को 50ः कम किया गया है तथा दूसरे वर्ष से क्रमिक टर्नओवर मानदंड को 25ः से घटाकर 10ः किया गया है। इसके अंतर्गत एमएमएफ अपैरल एवं फैब्रिक्स के 17 नए उत्पादों को शामिल कर कुल उत्पाद सूची का विस्तार किया गया है तथा योजना का लाभ उठाने के लिए नई कंपनी स्थापित करने की शर्त को भी हटा दिया गया है। ये संशोधन पूरे एमएमएफ मूल्य श्रृंखला में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा एमएमएफ अपैरल, फैब्रिक्स तथा तकनीकी वस्त्र उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सरकार देश के टेक्सटाइल सेक्टर में क्षमता निर्माण के लिए ‘समर्थ के नाम से दृ स्कीम फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग इन टेक्सटाइल सेक्टर’ योजना चला रही है। इसका उद्देश्य संगठित कपड़ा एवं संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए उद्योग के प्रयासों को पूरक करते हुए, मांग-आधारित, प्लेसमेंट-उन्मुख कौशल कार्यक्रम उपलब्ध कराना है। यह योजना पूरे भारत में संगठित क्षेत्र में स्पिनिंग और वीविंग को छोड़कर समूचे टेक्सटाइल वैल्यू चेन को कवर करती है । इस योजना के तहत, प्रारंभ से लेकर 09.12.2025 तक कुल 5.40 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित (उत्तीर्ण) किया जा चुका है। देश में तकनीकी वस्त्र (टेक्निकल टेक्सटाइल) क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने वर्ष 2020-21 से 2025-26 की अवधि के लिए 1,480 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान कर ‘नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन’ (एनटीटीएम) शुरू किया है। आवंटित धनराशि तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त, दोनों प्रकार के अनुसंधान एवं विकास; तकनीकी वस्त्रों के प्रसार को प्रोत्साहन एवं बाज़ार विकास गतिविधियों के माध्यम से बढ़ाने तथा तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में प्रशिक्षित एवं शिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के लिए आबंटित की गयी है। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय, हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय के माध्यम से, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम तथा कच्चे माल आपूर्ति योजना भी संचालित कर रहा है, ताकि देशभर के हथकरघा बुनकरों को वित्तीय सहायता, आधुनिक मशीनरी तथा बाजार पहुंच प्रदान की जा सके तथा हथकरघा श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके। उपरोक्त योजनाओं के तहत, पात्रता प्राप्त हथकरघा एजेंसियों/कार्मिकों को कच्चे माल, उन्नत लूम एवं सहायक उपकरणों की खरीद, सौर प्रकाश इकाइयों, कार्यशाला निर्माण, उत्पाद विविधीकरण एवं डिजाइन नवाचार, तकनीकी एवं साझा अवसंरचना, घरेलू/विदेशी बाजारों में हथकरघा उत्पादों का विपणन, बुनकरों की मुद्रा योजना के तहत रियायती ऋण तथा सामाजिक सुरक्षा आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसी तरह हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए, हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय कई योजनाएँ संचालित करता हैरू राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) तथा व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना (सीएचसीडीएस), देशभर में हस्तशिल्पों के समग्र विकास एवं प्रचार के लिए स्थापित किया गया है। इन योजनाओं के तहत, कारीगरों को अंत-से-अंत समर्थन प्रदान करने के लिए आवश्यकतानुसार वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें विपणन आयोजन, ब्रांडिंग तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हस्तशिल्प उत्पादों का विपणन शामिल है।

