
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और सेक्टोरल फेडरेशनों/एसोसिएशनों के संयुक्त मंच ने बताया कि 12 फरवरी 2026 को आयोजित देशव्यापी आम हड़ताल में 30 करोड़ से अधिक मजदूरों, किसानों और विभिन्न तबकों ने भाग लिया। यह हड़ताल केंद्र सरकार की कथित जनविरोधी और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ एक बड़ा जनप्रदर्शन थी।
🔴 600 से अधिक जिलों में असर
देश के 600 से अधिक जिलों में संगठित और असंगठित क्षेत्र, ग्रामीण और शहरी इलाकों में व्यापक बंद और विरोध प्रदर्शन हुए। पुडुचेरी, असम, ओडिशा, झारखंड, तमिलनाडु, पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल और गोवा में बंद जैसे हालात रहे। राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के कई हिस्सों में भी व्यापक असर देखा गया।
🔴 प्रमुख सेक्टरों में हड़ताल
कोयला, इस्पात, बैंक, एलआईसी, जीआईसी, पेट्रोलियम, बिजली, डाक, दूरसंचार, परमाणु ऊर्जा, सीमेंट, बंदरगाह, चाय बागान, जूट मिलों और परिवहन सहित कई क्षेत्रों में कार्य बाधित रहा। रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों ने एक घंटे का कार्य बहिष्कार कर समर्थन जताया।
🔴 मुख्य मांगें
- चार लेबर कोड रद्द किए जाएं
- ड्राफ्ट सीड बिल और इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल वापस हों
- SHANTI एक्ट रद्द किया जाए
- MGNREGA बहाल किया जाए
- इंश्योरेंस में 100% FDI का निर्णय वापस हो
- शिक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगे
- सरकारी रिक्त पद भरे जाएं
- USA-India ट्रेड डील पर पुनर्विचार हो
🔴 लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला का आरोप
संयुक्त मंच ने आरोप लगाया कि लेबर कोड से हड़ताल के अधिकार और ट्रेड यूनियन गतिविधियों को कमजोर किया जा रहा है। सरकार पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने और सामाजिक सुरक्षा कम करने का आरोप लगाया गया।
🔴 दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी सभा हुई जिसमें INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, UTUC सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया। विपक्षी सांसदों ने भी संसद परिसर में एकजुटता दिखाई।



