
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | Reserve Bank of India (आरबीआई) के गवर्नर ने सोमवार को मुंबई में चुनिंदा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और उनके संघों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक आरबीआई के हितधारकों के साथ सतत संवाद और सहयोग की प्रक्रिया का हिस्सा थी
बैठक में उप गवर्नर T. Rabi Sankar, Swaminathan J, तथा S.C. Murmu सहित रिज़र्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
एमएसएमई की अहम भूमिका
गवर्नर ने अपने संबोधन में कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP), निर्यात और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई के लिए समय पर और पर्याप्त औपचारिक ऋण उपलब्ध कराना आरबीआई की प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने भारत सरकार और आरबीआई द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए किए गए विभिन्न नीतिगत एवं विनियामकीय उपायों का उल्लेख किया।
डिजिटल अपनाने और ऋण अनुशासन पर बल
गवर्नर ने एमएसएमई इकाइयों से औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ने, ऋण अनुशासन बनाए रखने और डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन न केवल पारदर्शिता बढ़ाते हैं, बल्कि उद्यमों की दीर्घकालिक आघात-सहनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत करते हैं।
प्रतिभागियों ने रखीं चुनौतियां
संवादात्मक सत्र के दौरान एमएसएमई प्रतिनिधियों ने ऋण प्रवाह से जुड़ी नीतिगत बाधाओं, परिचालनगत चुनौतियों और जमीनी स्तर की समस्याओं पर अपने सुझाव साझा किए। आरबीआई ने इन सुझावों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।
यह बैठक एमएसएमई क्षेत्र और केंद्रीय बैंक के बीच बेहतर समन्वय और पारदर्शी संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



