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घी से बना ‘ग्रीन’ बायोसरफैक्टेंट! नॉर्थ ईस्ट संस्थान की खोज बदल सकती है कॉस्मेटिक इंडस्ट्री का चेहरा

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी.एफ. हिंदी

पूर्वोत्तर भारत स्थित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान Institute of Advanced Study in Science and Technology ने एक ऐसा जैव-आधारित बायोसरफैक्टेंट विकसित किया है जो सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में कृत्रिम लुब्रीकेंट और सरफैक्टेंट का प्रभावी विकल्प बन सकता है। यह यौगिक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि जीवाणुरोधी गुणों से भी भरपूर है।

संस्थान के निदेशक Ashish K. Mukherjee के नेतृत्व में किए गए शोध में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया लैक्टोबैसिलस प्लांटारम JBC5 का उपयोग कर घी को वसायुक्त सब्सट्रेट के रूप में प्रयोग किया गया। यह एक अभिनव प्रयोग है, क्योंकि पारंपरिक रूप से सिंथेटिक रसायनों से तैयार सरफैक्टेंट पर्यावरण और त्वचा दोनों के लिए हानिकारक माने जाते हैं।

शोध में पाया गया कि यह बायोसरफैक्टेंट त्वचा और घाव संक्रमण के लिए जिम्मेदार जीवाणु स्टैफिलोकोकस ऑरियस के खिलाफ प्रभावी है। व्यावसायिक फेस वॉश में मिलाने पर इसने दाग-धब्बे हटाने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई।

तकनीकी दृष्टि से यह यौगिक 60% तक का इमल्सीफिकेशन इंडेक्स प्राप्त करता है और 276 डिग्री सेल्सियस तक उच्च तापमान पर भी स्थिर रहता है। विभिन्न पीएच स्तरों पर इसकी स्थिरता इसे औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त बनाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज कॉस्मेटिक और फार्मास्युटिकल उद्योग में हरित रसायन (ग्रीन केमिस्ट्री) की दिशा में बड़ा कदम है। फिलहाल वैज्ञानिक इसके व्यावसायीकरण के लिए विषाक्तता परीक्षण और खुराक मानकीकरण पर काम कर रहे हैं।

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