पालि दिवस पर वैश्विक मंथन—समानता, बंधुत्व और शांति का संदेश गूंजा
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विद्वानों ने दिखाया मार्ग, पालि साहित्य बना सामाजिक समरसता का आधार

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
पालि दिवस के अवसर पर आयोजित 17वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को एक वैश्विक मंच पर एकत्र कर दिया। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित इस भव्य आयोजन में ‘पालि साहित्य में समानता और बंधुत्व’ विषय पर देश-विदेश के विद्वानों ने गहन विचार-विमर्श किया।
Pali Society of India और तथागत बुद्ध चेयर के संयुक्त तत्वावधान में, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन बौद्धिक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रभावशाली केंद्र बनकर उभरा।
मुख्य वक्ता भदंत डॉ. तेजवरो महाथेरो ने पालि परंपराओं को वैश्विक शांति, समानता और भाईचारे की आधारशिला बताते हुए उनके महत्व को रेखांकित किया। वहीं कुलपति प्रमोद कुमार शर्मा ने पालि साहित्य की आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन में रवींद्र पंथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अकादमिक सत्रों में बौद्ध समाजशास्त्र, सामाजिक न्याय, संघ के भीतर सद्भाव और नैतिक मूल्यों पर आधारित कई शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन चर्चाओं ने न केवल शोध के नए आयाम खोले, बल्कि समाज को दिशा देने वाले ठोस विचार भी सामने रखे।
समापन सत्र में वक्ताओं ने जोर दिया कि पालि साहित्य के माध्यम से समानता और बंधुत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाना समय की मांग है। विशेषज्ञों ने ऐसे मंचों को वैश्विक संवाद और सांस्कृतिक सहयोग के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि पालि साहित्य हमारी सांस्कृतिक विरासत का मूल है, जो समाज को शांति और समरसता का मार्ग दिखाता है। उन्होंने इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह सम्मेलन बौद्ध अध्ययन, वैश्विक समझ और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।



