शिक्षा

वैश्विक मंदी पर चर्चा, लेकिन युवाओं के रोजगार संकट पर सवाल

. सेमिनार में आर्थिक चुनौतियों का जिक्र, समाधान पर कम फोकस

प्रबंधन छात्रों को ‘अवसर’ की सीख, जमीनी हालात पर बहस

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क | डीएफ हिंदी

लखनऊ स्थित एसआरएम बिजनेस स्कूल में “Impact of Global Economic Slowdown on India” विषय पर आयोजित विशेषज्ञ सत्र ने वैश्विक आर्थिक मंदी पर चर्चा का मंच तो दिया, लेकिन साथ ही कई महत्वपूर्ण सवाल भी छोड़ गया। ऐसे समय में जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता के दौर से गुजर रही हैं, प्रबंधन छात्रों के लिए आयोजित यह कार्यक्रम आर्थिक चुनौतियों की गंभीरता को सामने लाने का प्रयास था।

कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के बैनर तले किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में नवयुग कन्या डिग्री कॉलेज, लखनऊ की प्राचार्य प्रो. मंजुला उपाध्याय ने वैश्विक आर्थिक मंदी के कारणों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और इसके भारतीय अर्थव्यवस्था, उद्योग, व्यापार व रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भारत के लिए आर्थिक नीतियों में संतुलन, नवाचार और दीर्घकालिक रणनीति बेहद आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों को समझकर युवा प्रबंधन क्षेत्र में नए अवसर तलाश सकते हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब देश में रोजगार और उद्योग से जुड़ी चुनौतियां लगातार चर्चा में हैं, तब प्रबंधन शिक्षा संस्थानों को केवल सिद्धांतात्मक चर्चाओं से आगे बढ़कर छात्रों को वास्तविक बाजार की परिस्थितियों से भी अवगत कराना चाहिए। वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में युवाओं के सामने अवसरों के साथ-साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं, जिन्हें समझना उतना ही जरूरी है।

कार्यक्रम का संचालन एमबीए की छात्रा वंशिका मुंबई ने किया। उन्होंने वक्ता का परिचय देते हुए पूरे सत्र को व्यवस्थित और रोचक ढंग से आगे बढ़ाया।

कार्यक्रम के अंत में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शुभेंदु शेखर शुक्ल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए एमबीए विभाग की पिछले वर्ष की उपलब्धियों का उल्लेख किया और मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त किया।

अंत में एमबीए विभागाध्यक्ष श्रीमती रुचिता चौहान ने प्रो. मंजुला उपाध्याय को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में संस्थान के फैकल्टी सदस्यों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने इसे ज्ञानवर्धक बताया।

फिर भी बड़ा सवाल यही है कि क्या ऐसे सेमिनार प्रबंधन छात्रों को तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त रूप से तैयार कर पा रहे हैं, या उन्हें और अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

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