विज्ञान, खगोलिकी और तकनीक का संगम बना लखनऊ का शैक्षणिक कार्यक्रम, देशभर के विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की रही सक्रिय सहभागिता
विभिन्न कॉलेजों के 150 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया भाग, ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने साझा किया ज्ञान व अनुभव

निश्चय टाइम्स डेस्क। शिक्षा, विज्ञान और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम लखनऊ में ज्ञान, शोध और संवाद का प्रभावशाली मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों से आए विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को विज्ञान, खगोलिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिमोट सेंसिंग जैसे आधुनिक विषयों से जोड़ते हुए अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। नेशनल पी.जी. कॉलेज, लखनऊ से सर्वाधिक 92 प्रतिभागी शामिल हुए, जबकि वेदम से 11, छोटी जुबिली कॉलेज से 15, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (GGIC), शमीना से 10 तथा यूपीएएसी से 30 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि युवा वर्ग विज्ञान एवं तकनीकी विषयों में गहरी रुचि रखता है और ऐसे आयोजनों से उन्हें दिशा एवं प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने के लिए विज्ञान और शोध जगत के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की उपस्थिति रही। के.के.सी. के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. कमल कुमार पांडेय ने भौतिकी और वैज्ञानिक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री निमिष कपूर ने शोध और नवाचार की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
नेहरू प्लैनेटेरियम, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. वाई. रवि किरण ने खगोल विज्ञान को आम जनमानस से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि पठानी सामंता प्लैनेटेरियम, भुवनेश्वर के पूर्व निदेशक डॉ. शुभेंदु पटनायक ने अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की उपलब्धियों पर विस्तृत चर्चा की।
इसके अलावा रीजनल साइंस सिटी, लखनऊ के पूर्व प्रमुख राज मेहरोत्रा, सीएसटी, उत्तर प्रदेश के पूर्व निदेशक अनिल यादव, लखनऊ विश्वविद्यालय के खगोलिकी विभाग से डॉ. अलका मिश्रा, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के एआई विशेषज्ञ प्रोफेसर विकास मिश्रा तथा रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ डॉ. संघर्ष राव ने भी अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार रखे।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक में करियर की संभावनाओं, अनुसंधान की चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों से अवगत कराया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, खगोलिकी और रिमोट सेंसिंग जैसे विषयों पर हुई चर्चाओं ने प्रतिभागियों को समसामयिक वैश्विक परिदृश्य से जोड़ने का कार्य किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। समग्र रूप से यह आयोजन शैक्षणिक गुणवत्ता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और युवा सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ, जिसने लखनऊ को एक बार फिर ज्ञान और विज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित किया।



