मोदी विजन और योगी नेतृत्व का संगम: ₹9.12 लाख करोड़ का बजट बना विकास का ब्लूप्रिंट
निश्चय टाइम्स डेस्क, लखनऊ।

उत्तर प्रदेश सरकार के वर्ष 2026-27 के ₹9.12 लाख करोड़ के ऐतिहासिक बजट को लेकर राजनीतिक नेतृत्व और उद्योग जगत से व्यापक समर्थन सामने आया है। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा, उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ के निदेशक डॉ. प्रवीण सिंह जादौन तथा एसोचैम उत्तर प्रदेश राज्य विकास परिषद के सह-अध्यक्ष हसन याकूब ने इसे विकास, निवेश और आत्मनिर्भरता का मजबूत रोडमैप बताया है।
🔹 विनीत अग्रवाल शारदा: “डबल इंजन सरकार का विकास मॉडल”
विनीत अग्रवाल शारदा ने बजट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” मंत्र का धरातलीय स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
एमएसएमई, औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक हब, आसान ऋण सुविधा और निवेश प्रोत्साहन नीतियों को उन्होंने व्यापारी वर्ग के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ क्षेत्र में रैपिड रेल, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क और औद्योगिक निवेश को उन्होंने क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर बताया।
उन्होंने कहा, “यह बजट 25 करोड़ प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं का सम्मान है और ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में निर्णायक कदम है।”
🔹 डॉ. प्रवीण सिंह जादौन: “जनहितैषी और संतुलित विकास”
डॉ. जादौन ने कहा कि यह बजट शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सहकारी क्षेत्र को सशक्त करने वाला है। नए मेडिकल संस्थानों की स्थापना, ग्रामीण स्वास्थ्य विस्तार, कौशल विकास कार्यक्रम और कृषि अवसंरचना में निवेश को उन्होंने दूरदर्शी निर्णय बताया।
उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने से किसानों की आय बढ़ेगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं के लिए योजनाओं को उन्होंने सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
🔹 ASSOCHAM: “आर्थिक नेतृत्व की रूपरेखा”
एसोचैम के सह-अध्यक्ष हसन याकूब ने बजट को “रणनीतिक दृष्टि दस्तावेज” बताते हुए कहा कि 12.9% वृद्धि और 19.5% पूंजीगत व्यय राज्य के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।
उन्होंने बुनियादी ढांचे के लिए ₹27,103 करोड़, सड़कों-पुलों हेतु ₹34,468 करोड़, ऊर्जा क्षेत्र में ₹65,926 करोड़ तथा एमएसएमई के लिए ₹3,822 करोड़ के प्रावधान को उद्योग-अनुकूल बताया।
उत्तर प्रदेश का 65% मोबाइल फोन उत्पादन, ₹44,744 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात, 9 लाख युवाओं का कौशल प्रशिक्षण और 10 लाख रोजगार सृजन लक्ष्य को उन्होंने राज्य को राष्ट्रीय आर्थिक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करने वाला बताया।
एसोचैम ने राजकोषीय अनुशासन, 3% से कम घाटा और ऋण-जीएसडीपी अनुपात नियंत्रित रखने की नीति की भी सराहना की।
राजनीतिक और औद्योगिक नेतृत्व की संयुक्त प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश का यह बजट केवल वित्तीय प्रावधान नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 की दिशा में प्रदेश को अग्रणी बनाने की व्यापक रणनीति है।



